चंडीगढ़ 9 जनवरी( जगदीश कुमार) यू.टी. चंडीगढ़ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई वाहन डीलर एक्सचेंज में ली गई गाड़ी का स्वामित्व (Ownership) नए खरीदार के नाम स्थानांतरित नहीं करता है, तो वह सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी माना जाएगा।आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष अमरिंदर सिंह सिद्धू और सदस्य बृज मोहन शर्मा शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि वाहन डीलर की यह जिम्मेदारी है कि वह एक्सचेंज की गई गाड़ी का आरसी ट्रांसफर समय पर और विधिवत कराए। ऐसा न करने पर पुराने मालिक को कानूनी, आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।मामले में आयोग ने पाया कि डीलर द्वारा आरसी ट्रांसफर न किए जाने के कारण शिकायतकर्ता को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में गंभीर कमी
है।आयोग ने डीलर को दोषी ठहराते हुए उपयुक्त मुआवज़ा देने और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के निर्देश दिए।यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए अहम है जो वाहन एक्सचेंज के दौरान डीलर पर आरसी ट्रांसफर की जिम्मेदारी छोड़ देते हैं। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि डीलर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।