हिमाचल प्रदेश 14 जनवरी (दैनिक खबरनामा) हिमाचल उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि एचआरटीसी कर्मचारियों के लिए पहले से चली आ रही व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के पहचान पत्र पहले भी बनाए जाते रहे हैं, लेकिन अब उन्हें नई तकनीक के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्मचारियों के लिए जारी किया जा रहा हिम बस कार्ड यात्रा से संबंधित नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान पत्र के रूप में होगा। पुलिस कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे हिम बस कार्ड के संबंध में उन्होंने कहा कि इस मामले में निगम प्रबंधन से बात कर अलग से जांच करवाई जाएगी।उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन करीब 5 लाख यात्री एचआरटीसी बसों में सफर करते हैं। निगम को 28 प्रकार की रियायतें देनी पड़ती हैं। कई दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां निजी ऑपरेटर बस सेवा नहीं देते, वहां एचआरटीसी की बसें सेवाएं प्रदान कर रही हैं।इलेक्ट्रिक बसों का पहाड़ी इलाकों में ट्रायल
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि एक इलेक्ट्रिक बस ट्रायल के तौर पर हिमाचल प्रदेश लाई गई है। इस बस का परीक्षण 36 स्थानों पर किया गया है। अर्की, सोलन और सराहन जैसे क्षेत्रों में ट्रायल कर यह आंका जा रहा है कि इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता, चार्जिंग व्यवस्था और संचालन पहाड़ी क्षेत्रों में कितना व्यावहारिक है।हरिपुरधार बस हादसे की जांच के आदेशसिरमौर जिले के हरिपुरधार में हुए बस हादसे को लेकर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हुई थी। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग को मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके अलावा सड़क पर पाले के कारण बस के फिसलने की भी आशंका जताई गई है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में 148 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 147 को सुधार लिया गया है। इन स्थानों पर क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं और यूनियनों से भी सुझाव मांगे जाएंगे।एचआरटीसी के बेड़े से हटेंगी 500 पुरानी बसेंउप मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि एचआरटीसी के पास फिलहाल करीब 3200 बसें हैं, जिनमें से लगभग 500 बसों को हटाना जरूरी हो गया है। नियमों के अनुसार 15 साल या 9 लाख किलोमीटर चल चुकी बसों को सेवा से बाहर करना होता है। हालांकि, जब तक नई इलेक्ट्रिक बसें और 250 मिनी बसें नहीं आ जातीं, तब तक पुरानी बसों को पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता। इसके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।उन्होंने केंद्र सरकार की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि बाहरी राज्यों की बसों को 3 लाख रुपये जमा कर रूट लेने की छूट दी गई थी, जिसका हिमाचल सरकार ने विरोध किया था। अब बाहरी बसें दिल्ली से बुकिंग करने के बजाय रास्ते में ही सवारियां उठा रही हैं, जिससे हिमाचल की बसों को नुकसान हो रहा है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार अदालत में मामला लड़ रही है।शिमला रोपवे परियोजना की लागत बढ़ी शिमला रोपवे परियोजना को लेकर उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न विभागों से मंजूरी लेने में करीब 5 साल का समय लग गया, जिससे परियोजना की लागत बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। डॉलर की कीमत में वृद्धि का असर भी लागत पर पड़ा है। यह एक ग्लोबल टेंडर है और फिलहाल कंपनी के साथ बातचीत जारी है। टेंडर अभी फाइनल नहीं हुआ है। पहले इस परियोजना की लागत 1556 करोड़ रुपये आंकी गई थी।विक्रमादित्य सिंह के बयान पर प्रतिक्रियालोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि बयान किस संदर्भ में दिया गया है। कई बार किसी बयान को सुनने या पढ़ने के बाद ही उसका सही अर्थ स्पष्ट हो पाता है।उप मुख्यमंत्री की इस प्रेस वार्ता में परिवहन, सड़क सुरक्षा और विकास परियोजनाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की गई।