दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 7 जुलाई: नगर निगम और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की सांठगांठ से हुए 116.84 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले में अब तक 10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन निगम की अकाउंट्स शाखा में आउटसोर्स पर तैनात अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा अब भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर है।
घोटाला सामने आने के बाद से ही मिश्रा फरार चल रहा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने जिला अदालत में तीसरी बार अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई है। इससे पहले वह दो बार इस तरह की याचिका दाखिल कर चुका था, लेकिन दोनों बार उसने खुद ही उसे वापस ले लिया था।
नई अर्जी में मिश्रा ने खुद को निर्दोष बताया है। अदालत ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की है।
मार्च 2026 में उजागर हुए इस मामले में मिश्रा को मुख्य आरोपितों में गिना जा रहा है। आरोप है कि फर्जी कागजातों के आधार पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए आया फंड दूसरे खातों में भेजकर हड़पा गया।
शुरुआत में इस केस की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी। बाद में फाइल सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई अब तक मिश्रा को ट्रेस नहीं कर पाई है। एजेंसी यह भी पता कर रही है कि इतनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कर्मचारी को क्यों और कैसे दी गई।
जांच में अब तक यह सामने आया है कि आरोपियों ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में फर्जी एफडी बनाईं। इनके जरिए स्मार्ट सिटी का पैसा निकालकर पहले शेल कंपनियों में भेजा गया और फिर उस रकम को रियल एस्टेट में लगा दिया गया।