दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 14 जुलाई: भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता अब धरातल पर उतरने को तैयार है। 15 जुलाई, बुधवार से कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक ट्रेड एग्रीमेंट यानी सीटा के तहत अमल शुरू हो जाएगा। इसके बाद ब्रिटेन को भेजी जाने वाली लगभग 98 फीसदी भारतीय वस्तुओं पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा।
इस फैसले का सीधा असर यह होगा कि ब्रिटिश बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स की कीमत घटेगी और मांग बढ़ेगी। जो सामान पहले से रास्ते में है या ब्रिटेन के बंदरगाहों पर कस्टम क्लीयरेंस का इंतजार कर रहा है, उसे भी इस समझौते का फायदा मिलेगा।
बड़ा बाजार, छोटी हिस्सेदारी
ब्रिटेन हर साल करीब 949 अरब डॉलर का सामान दुनिया से मंगाता है। इसमें भारत का हिस्सा अभी सिर्फ 13.44 अरब डॉलर है। सेवाओं की बात करें तो ब्रिटेन 399 अरब डॉलर की सर्विसेज आयात करता है, जिसमें भारत का योगदान 21.66 अरब डॉलर है। सीटा में सेवाएं भी शामिल हैं, इसलिए भारत के लिए निर्यात बढ़ाने की गुंजाइश काफी बड़ी है।
कर्मचारियों को बड़ी राहत
समझौते का एक अहम प्रावधान कर्मचारियों के लिए है। ब्रिटेन में काम कर रही भारतीय कंपनियों के लगभग 75,000 कर्मचारियों को अब सामाजिक सुरक्षा के मद में अपनी तनख्वाह का बड़ा हिस्सा नहीं कटवाना पड़ेगा। अभी तक उन्हें करीब 23 फीसदी वेतन ब्रिटिश सरकारी फंड में जमा करना होता था, जो 10 साल से कम समय तक काम करने पर वापस भी नहीं मिलता था। इस नियम के हटने से उनकी सैलरी में लगभग 23 फीसदी की बढ़ोतरी मानी जा रही है।
ब्रिटिश सामान भी सस्ता होगा
सीटा दोतरफा है। इससे ब्रिटेन को भी भारत में अपने उत्पाद कम शुल्क पर बेचने का मौका मिलेगा। ऑटोमोबाइल, शराब, चॉकलेट, चांदी, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल उपकरण जैसी ब्रिटिश चीजें अब भारतीय ग्राहकों को कम दाम पर मिलेंगी। समझौते के अनुसार ब्रिटेन की इलेक्ट्रिक कारों को पांच साल बाद भारत में रियायती दर पर बेचने की अनुमति होगी।
2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार अभी भारत और ब्रिटेन के बीच वस्तु और सेवा मिलाकर सालाना 55 से 60 अरब डॉलर का व्यापार होता है। सरकार इसे 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाना चाहती है।
इन सेक्टरों को मिलेगा बूस्ट
टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते-चप्पल, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामान जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। इससे देश में रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि ब्रिटेन में कई कृषि और प्रसंस्कृत उत्पादों पर अभी 10 फीसदी से ज्यादा ड्यूटी लगती है। सीटा के बाद वह शून्य हो जाएगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। एमएसएमई के लिए भी यह समझौता बड़ा अवसर है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के सीईओ और महानिदेशक अजय सहाय ने बताया कि जूते और कपड़ा जैसे सामान पर ब्रिटेन में 12 से 16 फीसदी तक शुल्क लगता था, जो अब खत्म हो जाएगा। चूंकि ब्रिटेन और चीन के बीच ऐसा कोई व्यापार समझौता नहीं है, इसलिए ब्रिटिश बाजार में भारतीय उत्पाद अब चीनी सामान की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।