दैनिक खबरनामा | 18 अगस्त | नई दिल्ली: चुनाव के दौरान कथित तौर पर गलत तरीकों और काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को सरकार बदलने के बाद मनमाने तरीके से वापस नहीं लिया जा सकेगा। ऐसे मामलों को वापस लेने से पहले संबंधित हाई कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सांसद-विधायकों के साथ अब उम्मीदवार भी दायरे में
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा सांसदों और विधायकों के मामलों में लागू व्यवस्था अब चुनाव लड़ने वाले सामान्य उम्मीदवारों पर भी लागू होगी। यानी उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी के लिए भी हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे चुनावी मैदान में उतरने वाले लोगों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि सत्ता में बदलाव के बाद राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर आपराधिक मामलों से राहत हासिल करना आसान नहीं होगा।
सत्ता बदलने के बाद केस वापस लेने की परंपरा पर सवाल
पीठ ने सरकार बदलने के बाद राजनीतिक मामलों को वापस लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई। अदालत के मुताबिक, राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ ऐसे फैसले लिए जाना निष्पक्ष आपराधिक न्याय व्यवस्था की बुनियादी भावना के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से नैतिकता, ईमानदारी और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है। लोकतंत्र, कानून का शासन और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। इनमें से किसी भी पहलू से समझौता होने पर पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
10 लाख से अधिक नकदी मिलने पर इनकम टैक्स की कार्रवाई
चुनाव के दौरान काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अदालत ने नकदी बरामदगी को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि चुनावी जांच के दौरान स्टैटिक सर्विलांस टीम को 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी मिलती है, तो मामले की सूचना तत्काल इनकम टैक्स विभाग को दी जाए और आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाए।
इसके साथ ही जांच एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि मामला दर्ज होने की तारीख से एक साल के भीतर जांच पूरी की जाए। अदालत का उद्देश्य है कि चुनावी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच लंबे समय तक लंबित न रहे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो।