दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 29 जून : धनास क्षेत्र में वार्ड डेवलपमेंट फंड के तहत विशेष अनुमति से 82 लाख रुपये खर्च कर 53 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का मामला सोमवार को नगर निगम की बैठक में जोरदार बहस का विषय बन गया। पार्षदों ने खर्च की गई राशि और कार्य प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि उन्होंने अपने वार्ड में करीब 2.5 लाख रुपये की व्यवस्था कर 32 सीसीटीवी कैमरे स्थापित करवाए थे। ऐसे में 82 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद केवल 53 कैमरे लगाए जाना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में अनियमितताओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पार्षद कंवरजीत सिंह राणा ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि धनास में वार्ड डेवलपमेंट फंड के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकते हैं तो अन्य वार्डों में ऐसी सुविधा क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने सदन को बताया कि सामान्य तौर पर वार्ड डेवलपमेंट फंड से सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान नहीं है। चूंकि यह कार्य विशेष मामले के रूप में किया गया है, इसलिए इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि स्पेशल कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समिति सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान हरप्रीत कौर बबला ने यह भी सवाल उठाया कि इलेक्ट्रिकल कार्य होने के बावजूद इसे रोड डिवीजन विंग के माध्यम से कैसे करवाया गया। कई पार्षदों ने पूछा कि इतनी बड़ी परियोजना को निगम सदन की मंजूरी के बिना कैसे अमल में लाया गया, जबकि एफएंडसीसी को 50 लाख रुपये तक के कार्यों को ही स्वीकृति देने का अधिकार है।
इस पर एक्सईएन अजय गर्ग ने बताया कि यह काम वर्ष 1998 में बनाई गई वार्ड डेवलपमेंट फंड की गाइडलाइन के अनुरूप किया गया है। हालांकि कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि मामले में कई बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं है, इसलिए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
आम आदमी पार्टी के पार्षद योगेश ढींगरा ने सुझाव दिया कि 1998 में तैयार किए गए नियमों की वर्तमान परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप समीक्षा कर उन्हें अद्यतन किया जाना चाहिए।
टीटी वाटर सप्लाई बंद रहने पर भी उठे सवाल
बैठक में पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला ने चार महीने से टर्शरी ट्रीटेड (टीटी) वाटर सप्लाई बाधित रहने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि करीब आठ महीने पहले अधिकारियों ने पाइपलाइन बिछाने का कार्य जल्द पूरा होने का दावा किया था, लेकिन अब तक परियोजना अधूरी है।
मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी टीटी वाटर की आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है। उन्होंने इंजीनियरिंग विभाग को 24 घंटे के भीतर स्थिति सुधारने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मामले की सीबीआई जांच की मांग की जा सकती है।
चीफ इंजीनियर ने बताया कि कुल 165 किलोमीटर प्रस्तावित नेटवर्क में से 116 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। कुछ मशीनों के प्रतिस्थापन के कारण परियोजना में देरी हुई है। इस पर मेयर ने कहा कि जहां लंबे समय से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही, वहां उपभोक्ताओं से शुल्क भी नहीं लिया जाना चाहिए।
कमिश्नर अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं क्षेत्रों में बिल वसूला जा रहा है जहां पाइपलाइन का कार्य पूरा हो चुका है।
सड़क निर्माण कार्यों में देरी पर भी चर्चा
सदन में पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने शहर में सड़क निर्माण परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई टेंडरों को मंजूरी दिए जाने के बावजूद जमीन पर कार्य दिखाई नहीं दे रहा है।
जवाब में चीफ इंजीनियर ने बताया कि बिटुमिन की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। इस पर अनूप गुप्ता ने कहा कि यूटी प्रशासन द्वारा वी-3 रोड का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि नगर निगम की परियोजनाएं अब भी लंबित हैं, जबकि दोनों जगह एक ही ठेकेदार कार्य कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि टेंडर स्वीकृत होने के बाद भी काम शुरू कराने के लिए पार्षदों को अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस पर एसई धर्मेंद्र शर्मा ने आश्वासन दिया कि पांच-पांच वार्डों के पार्षदों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित कर लंबित कार्यों की समीक्षा की जाएगी। पहली बैठक बुधवार को प्रस्तावित है।