सड़क सुरक्षा फोर्स ने तैयार किया भारत के पहले 3डी पुलिसिंग मॉडल का रोडमैप; दो वर्षों में 43,983 हादसों में पहुंचकर 47,386 लोगों की मदद की
दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 13 अगस्त 2026. पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी देश के लिए नया मॉडल तैयार कर रही है। पंजाब की सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, सैटेलाइट चित्रों, भू-स्थानिक तकनीक और वास्तविक समय के आंकड़ों को एकीकृत कर पंजाब को भारत का सड़क सुरक्षा केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत भारत के पहले 3डी पुलिसिंग मॉडल का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से हादसों की पहचान, संभावित खतरों का पूर्वानुमान और पुलिस की त्वरित कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा।
पंजाब पुलिस के महानिदेशक गौरव यादव ने कहा कि एसएसएफ ने पिछले दो वर्षों में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक एसएसएफ ने 43,983 सड़क हादसों में पहुंचकर 47,386 लोगों की सहायता की। इनमें 19,973 लोगों को घटनास्थल पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।
एसएसएफ की निगरानी वाले विशेष राजमार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 45 से 48 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इन मार्गों पर हादसों में मौतों की संख्या वर्ष 2023 में 1,955 थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 1,016 रह गई। यानी करीब एक वर्ष में इन विशेष मार्गों पर लगभग 940 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली।
‘प्लैटिनम 10 मिनट’ बना एसएसएफ का मूल मंत्र
सड़क सुरक्षा फोर्स की पूरी कार्यप्रणाली ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसका उद्देश्य सड़क हादसे की सूचना मिलने के बाद पीड़ित तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुंचना और एंबुलेंस के पहुंचने से पहले उसे तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है।
एसएसएफ की टीमें हादसों पर औसतन छह से दस मिनट के भीतर पहुंचकर कार्रवाई करती हैं। अत्याधुनिक वाहनों में गति मापने वाली मशीन, सांस में शराब की जांच करने वाला उपकरण, ई-चालान मशीनें, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट सहित कई आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं।
144 अत्याधुनिक वाहन और 1,600 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी
पंजाब की सड़क सुरक्षा फोर्स में 144 अत्याधुनिक वाहन और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। इनमें करीब 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं। एसएसएफ की टीमें महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और प्रमुख जिला सड़कों के करीब 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में हर 30 किलोमीटर पर रणनीतिक रूप से तैनात की गई हैं।
एसएसएफ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कर्मचारियों को सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में नहीं लगाया जाता। उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सड़क सुरक्षा, हादसों पर तत्काल कार्रवाई और दुर्घटना पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराना है।
दूसरे चरण में 6,000 किलोमीटर सड़कों तक होगा विस्तार
एसएसएफ के दूसरे चरण में इसकी कवरेज को मौजूदा 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा।
वहीं, ‘विजन एसएसएफ-2047’ के तहत सैटेलाइट डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और भू-स्थानिक तकनीक को एकीकृत कर व्यापक सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों का इस्तेमाल होगा। इससे पुलिस को वास्तविक समय में सड़क एवं यातायात की स्थिति की जानकारी मिलेगी और संभावित हादसों तथा अन्य खतरों का पहले से अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि ‘विजन एसएसएफ-2047’ का उद्देश्य सड़क हादसों को न्यूनतम स्तर तक लाना, पूरी तरह हरित परिवहन गलियारे विकसित करना और पंजाब सड़क सुरक्षा एवं यातायात अनुसंधान केंद्र के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस घटना मानचित्रण, यातायात जाम की भविष्यवाणी और आपदा प्रबंधन के लिए सैटेलाइट संचार तथा भू-स्थानिक आंकड़ों का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा भू-समकालिक नैनो या सूक्ष्म उपग्रह के साथ एसएसएफ को एकीकृत करने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
प्रवर्तन से सेवा की ओर बदली पुलिसिंग की सोच
डीजीपी ने कहा कि एसएसएफ की सफलता केवल नए वाहनों और तकनीक के कारण नहीं है, बल्कि यह प्रवर्तन से सेवा की ओर पुलिसिंग की सोच में आए बदलाव का परिणाम है।
एसएसएफ ने सड़क सुरक्षा के अलावा पुलिस प्रवर्तन और जनसेवा में भी अहम योगदान दिया है। फोर्स ने छह किलोग्राम अफीम और चोरी किए गए वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा नकदी और सोना उनके वास्तविक मालिकों तक वापस पहुंचाने में मदद की गई है।
एसएसएफ की टीमों ने 12 से अधिक लोगों को आत्महत्या करने से रोका, स्कूली बच्चों की सहायता की तथा देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों को भी मदद उपलब्ध कराई।
स्मार्ट निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
एसएसएफ परियोजना में बुद्धिमान परिवहन प्रबंधन प्रणाली को तकनीकी आधार बनाया गया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट आधारित सेंसर और वास्तविक समय के आंकड़ों को एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से स्वचालित प्रवर्तन, स्मार्ट निगरानी और आंकड़ों के आधार पर यातायात योजना तैयार करने में मदद मिल रही है।
स्वचालित नंबर प्लेट पहचान आधारित प्रवर्तन, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण और मोबाइल इंटरसेप्टरों के इस्तेमाल से पुलिस बल हादसों पर कार्रवाई का औसत समय सात मिनट से कम करने में सफल रहा है।
‘रोड सेफ्टी पंजाब’ के तहत 7ई ढांचे—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आपातकालीन देखभाल, सहभागिता और मूल्यांकन— के माध्यम से यातायात प्रबंधन में व्यापक बदलाव लाया जा रहा है। इससे अनुमान आधारित व्यवस्था से हटकर आंकड़ों, तकनीक और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित सड़क सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है।
अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर होगा सड़क सुरक्षा का विस्तार
पंजाब सड़क सुरक्षा एवं यातायात अनुसंधान केंद्र अनुसंधान, परामर्श और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभा रहा है। इसे शिक्षा जगत, उद्योग और नागरिक समाज से जुड़े अनुसंधान सलाहकार समूहों का सहयोग मिल रहा है।
आईआईटी, एनआईटी, प्लाक्षा विश्वविद्यालय, जीएनडीईसी लुधियाना और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से साझा आंकड़ों, अनुसंधान परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अन्य राज्यों से अलग है पंजाब का एसएसएफ मॉडल
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हाईवे सुरक्षा, तकनीक के इस्तेमाल और सार्वजनिक जवाबदेही को लेकर विभिन्न राज्यों की व्यवस्थाओं में अंतर है। पंजाब की एसएसएफ एक अलग और समर्पित फोर्स के रूप में काम कर रही है।
महाराष्ट्र हाईवे पुलिस जहां राज्य पुलिस की आधुनिक शाखा के रूप में काम करती है, वहीं पंजाब ने सड़क सुरक्षा के लिए अलग और विशेष फोर्स तैयार की है।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि एसएसएफ की सफलता केवल वाहनों की संख्या से नहीं मापी जा सकती। असली बदलाव पुलिस की कार्यप्रणाली में आया है, जहां प्रवर्तन के बजाय सेवा और लोगों की जान बचाना प्राथमिकता बन गया है।
विशेष प्रशिक्षण के साथ तैयार की गई पूरी फोर्स
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) अमरदीप सिंह राय ने कहा कि सामान्य पुलिस कर्मियों को कानून-व्यवस्था से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि एसएसएफ कर्मियों को लोगों की जान बचाने की स्पष्ट और सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।
एसएसएफ कर्मियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार और दुर्घटना जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें रेड क्रॉस द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि पूरी फोर्स ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ की अवधारणा के अनुसार तैयार की गई है। इसका उद्देश्य हादसा पीड़ित तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुंचकर एंबुलेंस के आने से पहले तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि एसएसएफ कर्मचारियों को वीआईपी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता और न ही स्थानीय कानून-व्यवस्था से संबंधित कार्यों के लिए उनकी ड्यूटी बदली जाती है। उनका मुख्य प्रदर्शन सूचकांक सड़क सुरक्षा और हादसा पीड़ितों की सहायता करना है।
27 जनवरी 2024 को हुई थी एसएसएफ की शुरुआत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 27 जनवरी 2024 को जालंधर में सड़क सुरक्षा फोर्स की औपचारिक शुरुआत की थी। पंजाब में सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए इस विशेष फोर्स का गठन किया गया था। उस समय राज्य में प्रतिदिन औसतन 17 से 18 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो रही थी।
अब तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और वैज्ञानिक यातायात प्रबंधन के सहारे पंजाब सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसे देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनाया जा सके।
एसएसएफ का लक्ष्य स्पष्ट है—हादसे के बाद सिर्फ मदद पहुंचाना नहीं, बल्कि तकनीक की मदद से हादसे होने से पहले ही संभावित खतरे को पहचानना और लोगों की जान बचाना।