दैनिक खबरनामा | 13 अगस्त | पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी बहस के बीच राज्य सरकार ने अवैध शराब की बिक्री और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई और कड़ी करने का फैसला किया है। अब राज्य में यदि किसी कंपनी के ब्रांड की शराब अवैध तरीके से पकड़ी जाती है, तो उस कंपनी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में मद्य निषेध विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। उनका स्पष्ट कहना है कि अवैध शराब के कारोबार में किसी भी स्तर पर भूमिका सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा।
शराब की खेप पकड़ी गई तो कंपनी भी होगी आरोपी
मदन सहनी ने बताया कि यदि बिहार में किसी कंपनी की विदेशी शराब की खेप अवैध रूप से बरामद होती है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही कंपनी के मालिक को भी मामले में आरोपी बनाया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि हाल में पटना में विदेशी शराब की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। इस मामले में शराब की तस्करी करने वालों के अलावा संबंधित कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
तस्करी करने वालों पर सरकार की नजर
पटना स्थित जदयू कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मदन सहनी ने कहा कि सरकार शराब की तस्करी और अवैध कारोबार पर लगातार निगरानी रख रही है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री के अनुसार शराबबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है। अधिकारियों को भी कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
शराबबंदी कानून में फिलहाल संशोधन नहीं
बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा और उसमें बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मदन सहनी ने कहा कि फिलहाल कानून में किसी तरह के संशोधन की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि विभाग समय-समय पर शराबबंदी कानून और उसके अमल की समीक्षा करता है। पिछले महीने भी कानून की समीक्षा की गई थी।
मंत्री ने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लागू हुए करीब 10 वर्ष हो चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर लागू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य समाज और परिवारों पर शराब के दुष्प्रभाव को कम करना था।
कमजोर वर्गों और परिवारों को लाभ का दावा
मदन सहनी ने कहा कि शराबबंदी लागू करने के पीछे महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अति पिछड़े वर्ग समेत समाज के कमजोर तबकों के हितों को प्राथमिकता दी गई थी। सरकार का दावा है कि शराबबंदी के बाद कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कई दिहाड़ी मजदूर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब खरीदने में खर्च कर देते थे। ऐसे में घर लौटने पर परिवार के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचता था। उनके मुताबिक, शराबबंदी लागू होने के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।