दैनिक खबरनामा नई दिल्ली 28 मई : कक्षा 9वीं और 10वीं में तीसरी भाषा अनिवार्य करने के फैसले को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और Central Board of Secondary Education को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के मध्य में तय की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने दायर याचिका में कहा गया है कि नई भाषा व्यवस्था विद्यार्थियों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ डाल सकती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पहले से ही छात्रों पर पढ़ाई और परीक्षाओं का दबाव रहता है, ऐसे में एक और भाषा को अनिवार्य करना कई विद्यार्थियों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है।
दरअसल, CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड के अनुसार 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाओं का चयन करना होगा। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य रहेगा। यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषा चुनना चाहता है, तो पहली दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी होंगी। बोर्ड ने विदेशी भाषाओं को चौथी भाषा के विकल्प के रूप में भी रखने की अनुमति दी है।
इस फैसले को लेकर शिक्षा क्षेत्र में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इसे बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कई अभिभावक और छात्र इसे अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बता रहे हैं। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।