दैनिक खबरनामा 6 मई 2026 पंजाब के गांव खाईफेमीकी में ऑपरेशन सिन्दूर की दर्दनाक यादें आज भी जिंदा हैं। यह गांव उस भयावह रात का गवाह है, जिसने जसवंत सिंह की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी। आज उसके घर पर ताला लटका है, लेकिन अंदर का मंजर अब भी उस हादसे की कहानी बयां करता है—जली हुई कार, धमाके से टूटी दीवारें और बिखरा सामान हर आने-जाने वाले को झकझोर देता है।हमले के बाद जसवंत सिंह अपना घर छोड़कर गांव वरियाम वाला में अपने रिश्तेदारों के पास रहने को मजबूर हो गया है। जब उसकी नई जगह पर उससे मुलाकात हुई, तो दादा दर्शन सिंह, चाचा गुरबच्चन सिंह और अन्य परिजन उसके साथ खड़े नजर आए। जैसे ही पुराने घर की बात छिड़ी, जसवंत की आंखें नम हो गईं।जसवंत ने बताया कि ऑपरेशन सिन्दूर की रात वह घर में पशुओं को संभाल रहा था, तभी पाकिस्तानी ड्रोन से दागी गई मिसाइल ने उसके घर को तबाह कर दिया। इस हमले में उसके माता-पिता, सुखविंदर कौर और लखविंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वह खुद भी गंभीर रूप से झुलस गया। करीब एक महीने तक वह अस्पताल में भर्ती रहा, जहां पंजाब सरकार ने उसका इलाज करवाया।आज भी जब जसवंत अपने पुराने घर जाता है, तो वहां के खौफनाक मंजर उसे अंदर तक हिला देते हैं और वह खुद को संभाल नहीं पाता। माता-पिता की कमी उसे हर दिन खलती है, लेकिन दादा और चाचा का साथ उसे संभालने का हौसला देता है। परिवार का प्यार ही अब उसके लिए जीने की सबसे बड़ी ताकत बन गया है।