दैनिक ख़बरनामा 12 मई 2026 नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स क्षेत्र के पास स्थित मस्जिद कैंप, भाई राम कैंप और डीआईडी कैंप को खाली कराने का आदेश दिया है। अदालत ने इन कैंपों में रहने वाले लोगों को 15 दिनों के भीतर बस्तियां खाली करने के निर्देश दिए हैं।न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है और ऐसे मामलों में न्यायालय को सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए। कोर्ट ने सरकार के फैसले को उचित ठहराते हुए प्रभावित परिवारों को सावदा-घेवरा स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में पुनर्वासित करने का आदेश दिया।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि बस्तियां हटने से उनकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों को सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन यदि मूल स्थान पर पुनर्वास संभव नहीं है तो सरकार वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वास कर सकती है।
कोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) को पुनर्वास नीति और तय प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि पुनर्वास स्थल पर शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पेयजल और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।अदालत ने लाभार्थियों को योगदान राशि और रखरखाव शुल्क जमा करने के लिए तीन माह की राहत भी दी है। जिन निवासियों ने अब तक आवंटन पत्र प्राप्त नहीं किए हैं, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के बाद आवंटन पत्र लेकर कब्जा लेने और निर्धारित 15 दिनों के भीतर मौजूदा कैंप खाली करने को कहा गया है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में पुनर्वास स्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो प्रभावित परिवार दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं। इस फैसले के बाद तीनों कैंपों के सैकड़ों परिवारों को सावदा-घेवरा में पुनर्वासित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।