दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 3 जून : पश्चिम एशिया में जारी तनाव, तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच 2 जून की रात वैश्विक वित्तीय बाजारों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिले। एक ओर अमेरिकी शेयर बाजार ने नए रिकॉर्ड बनाए, वहीं दूसरी ओर तेल बाजार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति निवेशकों की चिंता का कारण बनी रही।
अमेरिकी शेयर बाजारों ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती दिखाई। डॉ जोन्स औद्योगिक औसत लगभग 230 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एस ऐंड पी 500 पहली बार 7,600 अंकों के स्तर से ऊपर बंद होकर नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया। यह लगातार नौवां कारोबारी सत्र था जब एसएंडपी 500 बढ़त के साथ बंद हुआ, जो 1995 के बाद इसकी सबसे लंबी तेजी मानी जा रही है। वहीं तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक समग्र सूचकांक ने भी नया उच्च स्तर हासिल किया।
हालांकि, अल्फाबेट इंक.के शेयरों में करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी द्वारा लगभग 80 अरब डॉलर जुटाने की योजना की खबरों के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से मिले सकारात्मक संकेत
अमेरिका के श्रम बाजार से भी उत्साहजनक आंकड़े सामने आए। अप्रैल में नौकरी के नए अवसर बढ़कर 76.2 लाख हो गए, जो लगभग दो वर्षों का उच्चतम स्तर है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से काफी बेहतर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार रोजगार अवसरों में वृद्धि मुख्य रूप से प्रोफेशनल और बिजनेस सर्विसेज क्षेत्र के कारण हुई।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर बढ़ी उम्मीदें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अगले एक सप्ताह के भीतर ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जिससे होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी सामान्य बनी रह सके। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है और बातचीत रुकने की खबरें सही नहीं हैं।
दूसरी ओर ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान में अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अंतिम मसौदे पर विचार-विमर्श जारी है। हालांकि ईरानी पक्ष अब भी अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को लेकर सतर्क बना हुआ है।
लेबनान सीमा पर संघर्ष जारी
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीमा पर झड़पें जारी हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई लक्ष्यों पर कार्रवाई की, जबकि हिजबुल्लाह ने इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान ने होरमुज क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं और किसी भी संभावित समझौते में समुद्री यातायात की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
तेल बाजार में बढ़ी अस्थिरता
भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड तेल शुरुआती गिरावट से उबरकर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है।
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है, जबकि किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का जोखिम भी बना हुआ है।
टेक सेक्टर और क्रिप्टो बाजार में हलचल
तकनीकी क्षेत्र में मार्वेल टेक्नोलॉजी के शेयरों में 32 प्रतिशत तक की उछाल देखी गई। यह तेजी जेंसन हुआंग की उस टिप्पणी के बाद आई जिसमें उन्होंने कंपनी की विकास संभावनाओं की सराहना की।
वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने एक नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल पेश किया है, जिसका उद्देश्य लागत कम करना और बाहरी एआई प्लेटफॉर्म पर निर्भरता घटाना है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में दबाव बना रहा और बिटकॉइन 70,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया।
निष्कर्ष
2 जून की रात के घटनाक्रमों ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वैश्विक शेयर बाजार, ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक घटनाएं अब पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी हुई हैं। जहां अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं, वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता का परिणाम आने वाले दिनों में तेल की कीमतों और वैश्विक निवेशकों की धारणा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।