दैनिक खबरनामा | बेंगलुरु, 1 जून : भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब केवल योजनाओं और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई घरेलू कंपनियां व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। चिप डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही भारतीय स्टार्टअप कंपनियां अब अपने उत्पादों का परीक्षण ग्राहकों के साथ कर रही हैं और अगले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को नई ऊर्जा प्रदान की है। हालांकि इस प्रगति के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां उद्योग की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
परीक्षण से उत्पादन की ओर बढ़ते कदम
देश की कई उभरती चिप कंपनियों ने अपने उत्पादों को परीक्षण चरण से आगे बढ़ाकर ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। कुछ कंपनियां पहले ही उद्योग भागीदारों के साथ पायलट प्रोजेक्ट चला रही हैं, जबकि अन्य निकट भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर चिप्स की आपूर्ति शुरू करने की योजना बना रही हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रोकंट्रोलर, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोमेट्रिक समाधान और रक्षा क्षेत्र के लिए विकसित किए जा रहे भारतीय चिप्स को शुरुआती स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ रही मांग
देश में विकसित उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों का उपयोग रक्षा और रणनीतिक परियोजनाओं में भी बढ़ रहा है। विशेष रूप से नई पीढ़ी के पावर चिप्स और उच्च दक्षता वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों की मांग में वृद्धि देखी जा रही है। इससे घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिल रहे हैं और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।
सरकारी योजनाओं का दिख रहा असर
उद्योग जगत का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रोत्साहन योजनाओं ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। चिप डिजाइन और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लागू विभिन्न योजनाओं ने स्टार्टअप्स को अनुसंधान, विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायता प्रदान की है।
पहले जहां किसी चिप को बाजार तक पहुंचाने में कई वर्ष लग जाते थे, वहीं अब यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो गई है। इससे भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी हैं।
2034 तक कई गुना बढ़ सकता है बाजार
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आने वाले वर्षों में तेज गति से विस्तार कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण इस उद्योग के आकार में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
सप्लाई चेन अब भी बड़ी चुनौती
हालांकि प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन अधिकांश भारतीय निर्माता अभी भी कई महत्वपूर्ण चिप्स और घटकों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भर हैं। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं और भू-राजनीतिक परिस्थितियां उद्योग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घरेलू निर्माण क्षमता को और बढ़ावा मिला तथा सरकारी समर्थन जारी रहा, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही यह प्रगति भारत के तकनीकी और औद्योगिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घरेलू कंपनियों का उत्पादन चरण की ओर बढ़ना न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश को उच्च तकनीक निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।