दैनिक खबरनामा |वॉशिंगटन/तेहरान/बेरूत, 3 जून, 2026 : पश्चिम एशिया में कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला एक साथ जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच संघर्ष विराम की दिशा में प्रगति हुई है तथा दोनों पक्षों ने हमले रोकने पर सहमति जताई है। हालांकि क्षेत्र में घटनाक्रम इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद लेबनान की दिशा से दो रॉकेट दागे गए, जिन्हें इस्राइली वायुसेना ने बीच रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों के अनुसार तेहरान प्रतिबंधों में वास्तविक राहत और सुरक्षा संबंधी ठोस कदमों की मांग कर रहा है।

ईरान पर मिसाइल हमलों का आरोप, अमेरिका का जवाबी कदम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान द्वारा क्षेत्रीय देशों की ओर दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों को विफल कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, जबकि बहरीन की दिशा में भेजी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की वायु रक्षा प्रणालियों ने मार गिराया।
अमेरिका ने इसके जवाब में ईरान के क़ेशम द्वीपको निशाना बनाकर कार्रवाई करने का दावा किया है। हालांकि ईरानी अधिकारियों की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यूएई के परमाणु संयंत्र को लेकर आईएईए सक्रिय
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर मई में हुए ड्रोन हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने तकनीकी सहायता बढ़ाने की घोषणा की है।

आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि हमले के बाद संयंत्र संचालकों ने त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी, जिससे रिएक्टर को सुरक्षित रूप से बंद किया जा सका। उन्होंने बताया कि एजेंसी अब तकनीकी मूल्यांकन और मरम्मत कार्यों में सहयोग करेगी ताकि संयंत्र की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

क्षेत्र में अनिश्चितता कायम

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। एक ओर शांति वार्ताओं की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर मिसाइल हमले, ड्रोन गतिविधियां और जवाबी सैन्य कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता, इस्राइल-हिजबुल्ला संबंधों और खाड़ी देशों की सुरक्षा स्थिति पर वैश्विक निगाहें टिकी रहेंगी।

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