दैनिक खबरनामा। शिमला, 4 जून 2026:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दूसरे राज्यों से विवाह कर हिमाचल प्रदेश में बसने वाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को राज्य में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कहा कि केवल विवाह के आधार पर किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य में आरक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता। अदालत ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि विवाह के बाद किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित होने से संबंधित व्यक्ति उस राज्य की आरक्षण व्यवस्था का लाभ लेने का पात्र नहीं बन जाता।
खंडपीठ ने जसवंत कौर समेत चार महिलाओं द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया। इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ भी नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच इन याचिकाओं को खारिज कर चुकी थी।
मामले में अपील करने वाली दो महिलाएं पंजाब की सैनी जाति से थीं, जिन्हें ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया है, जबकि तीसरी महिला हरियाणा के वाल्मीकि समुदाय से संबंधित थी, जिसे अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। इन सभी महिलाओं ने हिमाचल प्रदेश में अपनी ही जाति के पुरुषों से विवाह किया था और राज्य में आरक्षण लाभ की मांग की थी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही संबंधित महिला अपने मूल राज्य में आरक्षित वर्ग से संबंधित हो और हिमाचल प्रदेश में भी उसकी जाति आरक्षित श्रेणी में शामिल हो, फिर भी केवल विवाह के आधार पर उसे हिमाचल प्रदेश की आरक्षण नीति का लाभ नहीं मिल सकता।
इस फैसले को राज्य में आरक्षण संबंधी नियमों और पात्रता मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक व्याख्या माना जा रहा है।