शिमला | 29 दिसंबर | जगदीश कुमार
साल 2025 हिमाचल प्रदेश के लिए अभूतपूर्व संकटों का गवाह बनकर सामने आया। इस वर्ष जहां एक ओर विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य की भौगोलिक और आर्थिक संरचना को झकझोर कर रख दिया, वहीं दूसरी ओर पुनर्निर्माण की होड़, बढ़ता कर्ज और नशे के खिलाफ जंग ने सरकार और प्रशासन के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दीं।
मानसून के दौरान हुई अत्यधिक बारिश ने पूरे प्रदेश में तबाही मचा दी। कई जिलों में बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भीषण भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। पहाड़ी इलाकों में बसे सैकड़ों गांवों का संपर्क टूट गया। सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और सार्वजनिक ढांचा मलबे में तब्दील हो गया। प्रकृति के इस प्रकोप ने किसी को नहीं बख्शा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन आपदाओं में कम से कम 240 लोगों की जान चली गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए और हजारों परिवार बेघर हो गए। कई इलाकों में लोग दिनों तक फंसे रहे, जिन्हें सेना, एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रबंधन की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला।
आपदाओं के बाद राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुनर्निर्माण की रही। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, स्कूलों और अस्पतालों को दोबारा खड़ा करने के लिए भारी धनराशि की जरूरत पड़ी। इसी बीच राज्य पर पहले से मौजूद कर्ज और तेजी से बढ़ गया। वित्तीय संकट इस कदर गहराया कि विकास कार्यों की रफ्तार भी प्रभावित होने लगी।
साल 2025 में हिमाचल प्रदेश में ‘चिट्टा’ (नशे) के खिलाफ अभियान भी सुर्खियों में रहा। युवाओं में फैलते नशे को लेकर सरकार और पुलिस ने सख्त कदम उठाए, लेकिन नशे का नेटवर्क पूरी तरह तोड़ पाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां हुईं, वहीं समाज में इसके दुष्परिणामों को लेकर चिंता बढ़ती गई।इसके अलावा, वर्ष के दौरान राज्य में कुछ ऐतिहासिक अदालती फैसले भी सामने आए, जिन्होंने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। वहीं, बिजली निगम के एक इंजीनियर की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत ने भी बड़ा विवाद खड़ा किया, जिसकी जांच को लेकर सवाल उठते रहे।कुल मिलाकर, वर्ष 2025 हिमाचल प्रदेश के लिए आपदाओं, संघर्ष और कठिन फैसलों का साल रहा। जहां एक ओर प्रकृति ने कड़ा इम्तिहान लिया, वहीं दूसरी ओर आर्थिक दबाव और सामाजिक चुनौतियों ने राज्य को गहरे संकट में डाल दिया। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और हिमाचल को दोबारा स्थिरता की राह पर लाती है।