दैनिक खबरनामा ब्यूरो। दुबई/वाशिंगटन, 6 जून अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को होरमुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन मार गिराने के बाद ईरान के तटीय रडार और निगरानी ठिकानों पर हवाई हमले किए।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान द्वारा छोड़े गए चार ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाने की मंशा से भेजे गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ड्रोन को निष्क्रिय करने के बाद ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित निगरानी एवं रडार केंद्रों पर जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों स्थान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं।

इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने 8 अप्रैल को हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार की बार-बार की जा रही कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि वाशिंगटन क्षेत्र में तनाव कम करने का इच्छुक नहीं है। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका को अपनी “अवैध कार्रवाइयों” और किसी भी संभावित सैन्य बढ़ोतरी के परिणामों की जिम्मेदारी उठानी होगी।

उधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि उसने होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहे चार तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिन्हें उसने बिना अनुमति जलमार्ग पार करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि शनिवार तड़के उसके हवाई क्षेत्र में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दाखिल हुईं, जिनमें से कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों के ऊपर से गुजरीं। सेना के अनुसार मिसाइलों के अवशेष विभिन्न स्थानों पर गिरे, जिससे कुछ भौतिक नुकसान हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

वहीं बहरीन में हमले की आशंका के बीच चेतावनी सायरन बजाए गए और प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

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