दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 8 जून 2026: मानसून के आगमन से पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर से होकर गुजरने वाले प्रमुख बरसाती नालों—सुखना चो, पटियाला की राव और एन चो—की जलधारण क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकासी (डी-सिल्टिंग) का कार्य तेज कर दिया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारी बारिश के दौरान इन जलधाराओं में आई बाढ़ से शहर के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन के अनुसार तटबंधों की कमजोरी और तलहटी में जमा गाद के कारण पानी की निकासी क्षमता कम हो गई थी, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ रहा था।
सुखना लेक के रेगुलेटरी एंड पर डी-सिल्टिंग का कार्य पहले ही शुरू किया जा चुका है और अब तक करीब 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पटियाला की राव में भी गाद निकालने का अभियान शुरू कर दिया गया है। यह जलधारा धनास, खुड्डा लाहौरा और डड्डूमाजरा जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करती है, जहां बरसात के दौरान पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाता है।
प्रशासन का मानना है कि गाद हटने से इन जलधाराओं की गहराई और जल वहन क्षमता बढ़ेगी, जिससे अत्यधिक वर्षा के दौरान भी पानी किनारों से बाहर नहीं निकलेगा। इससे सुखना चो में एकमुश्त अधिक पानी छोड़ने की आवश्यकता भी कम होगी।
सुखना चो और पटियाला की राव का प्रभाव केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है। इन जलधाराओं में अधिक पानी छोड़े जाने से पंचकूला, मोहाली और जीरकपुर के कई इलाके भी प्रभावित होते हैं। पिछले वर्षों में बलटाना क्षेत्र में बाढ़ के कारण पुलिस चौकी तक जलमग्न हो गई थी और आसपास के इलाकों में व्यापक जलभराव देखने को मिला था।
सुखना चो का पानी आगे चलकर घग्गर नदी में मिलता है। ऐसे में जलप्रवाह बढ़ने पर पंचकूला क्षेत्र में भी बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन को उम्मीद है कि डी-सिल्टिंग कार्य से इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
यूटी चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग विभाग ने विशेषज्ञ एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर सुखना लेक के सूखे क्षेत्र में डी-सिल्टिंग का कार्य शुरू किया है। परियोजना के तहत लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है और करीब 34 हजार घन मीटर मिट्टी निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अब तक लगभग 9 हजार घन मीटर मिट्टी निकाली जा चुकी है। इस मिट्टी का उपयोग झील के आसपास के तटबंधों और पैदल मार्गों को मजबूत बनाने में किया जा रहा है, जिससे बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था और सुदृढ़ होगी।
पिछले वर्ष पटियाला की राव में आई बाढ़ के कारण डड्डूमाजरा, धनास और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई थीं। इसी को देखते हुए यहां डी-सिल्टिंग कार्य को मंजूरी दी गई है।
मनोनीत पार्षद सतिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन विभाग और इंजीनियरिंग विभाग को मिलकर समन्वित कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि हजारों घन मीटर गाद हटाए जाने से तटबंध मजबूत होंगे और जल संरक्षण क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मानसून से पहले शुरू किया गया यह अभियान चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के हजारों लोगों को बाढ़ के खतरे से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।