दैनिक खबरनामा | 8 जून, 2026
तिरुवनंतपुरम: केरल में संक्रामक रोगों की बढ़ती चुनौतियों के बीच अब शिगेला संक्रमण (शिगेलोसिस) ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में इस वर्ष अब तक शिगेला संक्रमण के 126 मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि संक्रमण की चपेट में आए एक चार वर्षीय बच्चे की मौत होने से लोगों में चिंता का माहौल है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण की पुष्टि होने के बाद तीन बच्चों को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से दो बच्चों को सफल उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक बच्ची की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
निगरानी और बचाव उपाय तेज
राज्य सरकार ने संक्रमण के मामलों को देखते हुए निगरानी और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को केवल उबला और ठंडा किया हुआ पानी पीने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा दूषित भोजन और पानी से बचने की सलाह दी है।
अधिकारियों ने बताया कि वायनाड समेत अन्य जिलों में भी पेट संबंधी बीमारियों के मामलों की जांच की जा रही है। सुल्तान बथेरी क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में 164 छात्रों में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण पाए गए हैं, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये मामले शिगेला संक्रमण से जुड़े हैं या नहीं।
क्या है शिगेला संक्रमण?
शिगेला संक्रमण, जिसे शिगेलोसिस भी कहा जाता है, एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल रोग है जो शिगेला नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से बड़ी आंत को प्रभावित करता है और गंभीर दस्त, पेट दर्द, बुखार तथा शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह संक्रमण दूषित भोजन, दूषित पानी, गंदे हाथों और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। इसकी विशेषता यह है कि बहुत कम मात्रा में बैक्टीरिया भी संक्रमण फैलाने के लिए पर्याप्त होते हैं, जिससे इसका प्रसार तेजी से हो सकता है।
किन लोगों को अधिक खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इस संक्रमण से गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है। समय पर उपचार न मिलने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।
संक्रमण के सामान्य लक्षणों में लगातार दस्त, कई मामलों में खूनी दस्त, तेज बुखार, पेट में मरोड़, मतली, उल्टी, कमजोरी और डिहाइड्रेशन शामिल हैं।
केरल में बार-बार क्यों बढ़ते हैं संक्रामक रोग?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण भारत के कई हिस्सों में घने वन क्षेत्र, मानसूनी मौसम, तेजी से हो रहा शहरीकरण और मानव-वन्यजीव संपर्क बढ़ने के कारण संक्रामक एवं जूनोटिक बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है।
वनों की कटाई और पर्यावरणीय बदलावों के कारण जंगली जीवों और इंसानों के बीच संपर्क बढ़ा है, जिससे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों के फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि शिगेला संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना, शौचालय के उपयोग के बाद स्वच्छता बनाए रखना, सुरक्षित पेयजल का उपयोग करना तथा फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना बेहद जरूरी है।
अधिकांश मरीज 5 से 7 दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों की विशेष निगरानी और समय पर चिकित्सा सहायता आवश्यक है।