ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और वित्तीय बाजारों में तनाव बढ़ने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा सकता है

दैनिक खबरनामा ब्यूरो। वॉशिंगटन, 11 जून : विश्व बैंक ने गुरुवार को जारी अपनी नवीनतम ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स’ रिपोर्ट में वर्ष 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तो वैश्विक विकास दर घटकर मात्र 1.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रही, जो जनवरी के अनुमान से 0.2 प्रतिशत अंक अधिक थी। हालांकि 2026 के लिए अनुमान को 0.1 प्रतिशत अंक घटाया गया है, जो कोविड-19 महामारी के बाद का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।

विश्व बैंक ने कहा कि युद्ध के प्रभाव के चलते दुनिया के लगभग दो-तिहाई देशों के विकास अनुमान में कटौती की गई है। सबसे अधिक प्रभावित देशों में संयुक्त अरब अमीरात, इराक और अन्य मध्य पूर्वी देश शामिल हैं, जिनकी ऊर्जा निर्यात क्षमता संघर्ष के कारण प्रभावित हुई है।

ऊर्जा संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंताएं

रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध अब चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ा है और कई देशों में केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीतियां अपनाने की संभावना मजबूत हुई है। इसके अलावा उर्वरकों की कीमतों में भी तेज वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति संकट की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद बुधवार को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विश्व बैंक ने अपने आधारभूत अनुमान में इस वर्ष ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जो 2025 की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। बैंक का मानना है कि यदि जुलाई के अंत तक ऊर्जा आपूर्ति संबंधी बाधाएं कम हो जाती हैं तो वैश्विक महंगाई दर लगभग 4 प्रतिशत रह सकती है।

हालांकि यदि ऊर्जा संकट लंबे समय तक बना रहता है और तेल की औसत कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो वैश्विक विकास दर 2.1 प्रतिशत और महंगाई 4.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं यदि इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ता है, तो विकास दर घटकर 1.3 प्रतिशत तक आ सकती है।

विश्व बैंक के उप मुख्य अर्थशास्त्री आयहान कोसे ने कहा कि ऊर्जा और वित्तीय दबाव एक-दूसरे को मजबूत करते हैं तो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तेजी से कमजोर हो सकता है।

दीर्घकालिक चुनौतियों से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने कहा कि 2027 और 2028 में वैश्विक विकास दर बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो सकती है, लेकिन यह 2010 के दशक के औसत से अब भी 0.4 प्रतिशत अंक कम रहेगी।

उन्होंने कहा कि धीमी जनसंख्या वृद्धि, निजी और सार्वजनिक निवेश में कमी, बढ़ता सार्वजनिक कर्ज तथा वैश्विक व्यापार की कमजोर गति जैसी चुनौतियां आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही हैं। गिल के अनुसार वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था 2008 या 2018 की तुलना में कहीं कम लचीली है और आने वाले वर्षों में नीति संबंधी अनिश्चितता, महंगाई तथा ऊंची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं।

विकासशील देशों पर सबसे अधिक असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर वृद्धि के कारण विकसित देशों के साथ आय के अंतर को कम करने की प्रक्रिया लगभग ठहर गई है। चीन और भारत को छोड़कर कई विकासशील देश ऐसे हैं जो एक तरह के “खोए हुए दशक” का सामना कर रहे हैं।

विश्व बैंक ने विकासशील देशों की विकास दर 2025 के 4.4 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

भारत सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था

विश्व बैंक ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2025 में 7 प्रतिशत रहने के बाद 2026 में 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

इंदरमीत गिल ने कहा कि अगले दो दशकों तक भी भारत की आर्थिक वृद्धि अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रहने की संभावना है।

वहीं चीन की विकास दर 2026 में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2026 में 2.2 प्रतिशत, यूरोजोन 0.8 प्रतिशत और जापान 0.7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।

मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र के लिए 2026 की विकास दर का अनुमान घटाकर 1.6 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 2025 में 4 प्रतिशत था। हालांकि 2027 में इस क्षेत्र में 5 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना जताई गई है।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

धरती पर बढ़ सकता है गर्मी का कहर

दैनिक खबरनामा ब्यूरो| जिनेवा, 2 जून: वैश्विक मौसम प्रणाली में बड़े बदलाव…
Share to :

ईरानी एलपीजी नेटवर्क पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, बांग्लादेश को आपूर्ति के आरोप में लगाए व्यापक प्रतिबंध

दैनिक खबरनामा। वाशिंगटन, 6 जून 2026: अमेरिका ने ईरान के एक कथित…
Share to :

भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू, सीईपीए लागू होते ही निर्यातकों के लिए खुले बड़े अवसर

दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 1 जून : भारत और ओमान के बीच…
Share to :

पश्चिम एशिया तनाव के बीच वॉल स्ट्रीट में रिकॉर्ड तेजी, अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी वैश्विक बाजारों की नजर

दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 3 जून : पश्चिम एशिया में जारी तनाव,…
Share to :