दैनिक खबरनामा ब्यूरो। बेलफास्ट, 12 जून : उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में हाल के दिनों में भड़की नस्लीय हिंसा के बाद प्रवासी और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया गया है।

हिंसा की शुरुआत मंगलवार को एक चाकूबाजी की घटना के बाद हुई, जिसमें एक सूडानी नागरिक पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया। घटना के बाद नकाबपोश समूहों ने बेलफास्ट के कई इलाकों में उत्पात मचाया। उपद्रवियों ने मकानों और वाहनों में आग लगा दी तथा उन घरों और व्यवसायों को निशाना बनाया जिन्हें प्रवासियों या अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ा माना जा रहा था।

सूडान से शरणार्थी के रूप में 2016 में उत्तरी आयरलैंड पहुंचे ट्वासुल मोहम्मद ने कहा कि महिलाएं और बच्चे बेहद डरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।

ब्रिटेन के उत्तरी आयरलैंड मामलों के मंत्री ने इन हमलों को “नस्लवादी गुंडागर्दी” करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि कई लोग पहले ही अपने देशों में युद्ध और हिंसा का सामना कर चुके हैं और बेलफास्ट की घटनाएं उन्हें पुराने दर्दनाक अनुभवों की याद दिला रही हैं। समुदाय के प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि प्रवासी न तो आवास संकट के लिए जिम्मेदार हैं और न ही स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव के लिए। उनका कहना है कि वे समाज का हिस्सा बनकर उसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी संगठन यूनिसन की क्षेत्रीय सचिव पैट्रिशिया मैककिओन ने कहा कि उत्तरी आयरलैंड अभी भी सामाजिक विभाजन और संघर्ष की विरासत से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी तत्व लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं और समाज में नफरत फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

मैककिओन के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को कम से कम 30 परिवारों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया क्योंकि उन्हें हिंसा का निशाना बनाए जाने का डर था। उन्होंने यह भी बताया कि कई कर्मचारियों को सड़कों पर स्वयंभू निगरानी समूहों द्वारा रोका गया, उनकी जातीय पहचान की जांच की गई और उनका पीछा तक किया गया। एक नर्स का चार नकाबपोश व्यक्तियों द्वारा पीछा किए जाने का मामला भी सामने आया है।

हालांकि, इन तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच शहर में एकजुटता और मानवता के उदाहरण भी देखने को मिले हैं। भारत से तीन वर्ष पहले उत्तरी आयरलैंड पहुंचीं रुचिरा रंगप्रसाद ने प्रभावित परिवारों के लिए घर का बना भोजन उपलब्ध कराने की पहल शुरू की। सोशल मीडिया पर उनकी अपील के बाद 30 से अधिक स्वयंसेवक मदद के लिए आगे आए और दर्जनों खाद्य पैकेट जरूरतमंदों तक पहुंचाए।

बेलफास्ट इस्लामिक सेंटर की कार्यकारी समिति के सदस्य काशिफ अकरम ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले लोग बहुत कम हैं और शहर में बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं जो शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाले तत्व अल्पसंख्यक हैं, जबकि अधिकांश लोग एक सुरक्षित और समावेशी समाज चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेलफास्ट की हालिया घटनाएं सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर चुनौती हैं, लेकिन साथ ही संकट के समय सामने आई सामुदायिक एकजुटता यह भी दिखाती है कि समाज का बड़ा हिस्सा शांति और भाईचारे के पक्ष में खड़ा है।

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