दैनिक खबरनामा।नई दिल्ली, 12 जून — भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की जा रही अगली पीढ़ी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) के विकास परीक्षणों में कम से कम एक वर्ष की देरी होने जा रही है। हालांकि पहली नजर में यह परियोजना के लिए झटका प्रतीत होता है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर भी बन सकती है।

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के संयुक्त प्रबंध निदेशक अलेक्जेंडर मैक्सीचेव ने बताया कि ग्राहक की ओर से मिसाइल की आवश्यकताओं में बदलाव किए जाने के कारण उड़ान परीक्षण अभी शुरू नहीं हो सके हैं।

उन्होंने कहा कि नई आवश्यकताएं पहले की तुलना में अधिक कठोर और चुनौतीपूर्ण हैं, इसलिए मिसाइल के डिजाइन में अतिरिक्त सुधार करने होंगे। इस पुनःडिजाइन प्रक्रिया में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है।

2011 में शुरू हुई थी ब्रह्मोस-एनजी की परिकल्पना

ब्रह्मोस-एनजी परियोजना की घोषणा पहली बार मार्च 2011 में की गई थी। यह मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल का केवल उन्नत संस्करण नहीं, बल्कि पूरी तरह नए डिजाइन पर आधारित एक हल्की और छोटी सुपरसोनिक मिसाइल है।

प्रारंभिक योजना के अनुसार इसे ऐसे लड़ाकू विमानों पर ले जाया जा सकेगा जिनकी वहन क्षमता सीमित है, जैसे तेजस एमके-1ए और मिग-29यूपीजी। इसके अलावा इसे भविष्य में विकसित होने वाले स्टील्थ लड़ाकू विमानों के आंतरिक हथियार कक्ष में भी रखा जा सकेगा।

शुरुआती डिजाइन में मिसाइल की लंबाई लगभग 6 मीटर, व्यास 0.5 मीटर, गति मैक 3.5 तथा मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक निर्धारित की गई थी। बाद के वर्षों में इसकी लंबाई घटाकर लगभग 5 मीटर करने की चर्चा सामने आई, जिससे इसे पनडुब्बियों के टॉरपीडो ट्यूब से भी दागा जा सके।

क्या भारतीय इंजन बना देरी की वजह?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना में आई देरी के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण मिसाइल में स्वदेशी रैमजेट इंजन लगाने की योजना हो सकती है।

ब्रह्मोस-एनजी को छोटा और हल्का बनाने के लिए एक नए रैमजेट इंजन की आवश्यकता है। शुरुआत में इस इंजन को रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया द्वारा विकसित किया जाना था। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि भारत का रक्षा मंत्रालय इस मिसाइल में पूरी तरह भारतीय तकनीक से विकसित इंजन चाहता है।

भारत पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल के लिए आवश्यक रैमजेट इंजन तकनीक का बड़ा हिस्सा आत्मसात कर चुका है। देश में अब इन इंजनों के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण स्वदेशी उद्योग द्वारा किया जा रहा है।

डीआरडीओ विकसित कर रहा है नया इंजन

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला डीआरडीएल वर्तमान में एक तरल ईंधन आधारित रैमजेट इंजन विकसित कर रही है। यह इंजन भविष्य में मिसाइलों और हवाई लक्ष्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

इसी तकनीक का उपयोग डीआरडीओ की सुपरसोनिक टारगेट (STAR) परियोजना में भी किया जा रहा है। यह प्रणाली मैक 1.8 से 2.5 की गति हासिल कर सकती है और भविष्य में इसे युद्धक भूमिका में भी इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।

रिपोर्टों के अनुसार, इसी तकनीक पर आधारित एक उन्नत इंजन ब्रह्मोस-एनजी के लिए विकसित किया जा रहा है। नवंबर 2025 में डीआरडीओ ने इस इंजन के विकास और उत्पादन के लिए उद्योग भागीदार चुनने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रह्मोस-एनजी में रूसी इंजन के बजाय भारतीय इंजन लगाया जाता है, तो यह भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

हालांकि स्वदेशी इंजन के विकास में समय लग सकता है और परियोजना में और देरी की संभावना भी बनी रह सकती है, लेकिन इससे भविष्य में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अस्थायी देरी स्वीकार करना बेहतर है, बजाय इसके कि एक स्वदेशी हथियार प्रणाली लंबे समय तक विदेशी तकनीक पर निर्भर रहे।

निष्कर्ष

ब्रह्मोस-एनजी की विकास प्रक्रिया में आई देरी भारत की सैन्य आधुनिकीकरण योजनाओं के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन यदि यह देरी स्वदेशी रैमजेट इंजन को शामिल करने के कारण है, तो यह भविष्य में भारत को मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बना सकती है। ऐसे में यह विलंब एक बाधा नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए दीर्घकालिक निवेश साबित हो सकता है।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

बीएसएनएल जेटीओ भर्ती 2026: जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के 100 पदों पर आवेदन 4 जून से, सैलरी 40 हजार से अधिक

दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 3 जून : सरकारी नौकरी की तैयारी कर…
Share to :

मालवीय नगर अग्निकांड: रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, 20 लोगों की मौत; 37 लोगों को बचाया गया

दैनिक खबरनामा ब्यूरो. नई दिल्ली, 3 जून 2026: राजधानी दिल्ली के मालवीय…
Share to :

अहमदाबाद में अवैध घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई, 131 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में; जांच जारी

दैनिक खबरनामा। अहमदाबाद, 3 जून : गुजरात के अहमदाबाद में अवैध घुसपैठ…
Share to :

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर बढ़ा विवाद, केंद्र सरकार ने चेयरमैन और सचिव का किया तबादला, जांच समिति गठित

दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 2 जून :  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)…
Share to :