दैनिक खबरनामा। मुंबई, 13 जून: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कांग्रेस से अलग हो चुके दलों और नेताओं से फिर से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रभावी मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा कांग्रेस को “डूबता हुआ जहाज” बताए जाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि कांग्रेस आज भी देश की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति है और भाजपा उसके प्रभाव से भयभीत रहती है।
पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा, “आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस से डरते हैं। कांग्रेस कभी भी डूबता हुआ जहाज नहीं रही और न ही भविष्य में होगी।”
उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार से पहल करने का आग्रह करते हुए कहा कि कांग्रेस से निकले सभी दलों और नेताओं को एक मंच पर लाने की जिम्मेदारी उन्हें उठानी चाहिए। राउत ने कहा, “यदि हम भाजपा की राजनीति का मजबूती से मुकाबला करना चाहते हैं तो विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा। कांग्रेस को मजबूत बनाना देशहित में जरूरी है।”
राउत ने आगे कहा कि कांग्रेस छोड़ चुके नेताओं को अपने मतभेद भुलाकर फिर से साथ आने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि शरद पवार इस दिशा में पहल करते हैं तो विपक्षी एकता का नया अध्याय शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी एक क्षेत्रीय दल होने के बावजूद इस प्रयास में पूरा सहयोग देगी।
गौरतलब है कि एक दिन पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कोई भी समझदार व्यक्ति उस जहाज पर सवार नहीं होगा जो डूब रहा हो। राउत की टिप्पणी इसी बयान के जवाब के रूप में सामने आई है।
इस दौरान राउत ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को देश के स्वतंत्रता संग्राम और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में अपने योगदान का हिसाब देना चाहिए। राउत के अनुसार, “भाजपा बताए कि उसने देश और समाज के लिए क्या किया है। स्वतंत्रता संग्राम और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन जैसे ऐतिहासिक संघर्षों में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।”
राउत इससे पहले भी कांग्रेस से निकले दलों, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और एनसीपी (एसपी) जैसे संगठनों से कांग्रेस के साथ फिर से तालमेल बनाने की वकालत कर चुके हैं। उनका मानना है कि मजबूत विपक्ष के लिए व्यापक राजनीतिक एकजुटता आवश्यक है।