दैनिक खबरनामा ब्यूरो। स्टॉकहोम, 15 जून: स्वीडन की संसद ने सोमवार को एक नया और विवादास्पद कानून पारित किया, जिसके तहत खराब व्यवहार करने वाले प्रवासियों के निवास परमिट रद्द किए जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश में जिम्मेदार और कानून का पालन करने वाले प्रवासियों को बढ़ावा देना है।
नए कानून के अनुसार, यदि कोई प्रवासी करों का भुगतान नहीं करता, उस पर बकाया ऋण है, अवैध या घोषित किए बिना काम करता है या चरमपंथी संगठनों से उसके संबंध पाए जाते हैं, तो उसका निवास परमिट वापस लिया जा सकता है।
यह कानून न केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से जारी किए गए निवास परमिटों की भी समीक्षा की जा सकेगी। इस कदम को सितंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले आव्रजन नियमों को सख्त करने की सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री समर्थित दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स लंबे समय से आव्रजन नियंत्रण को सख्त करने की वकालत करते रहे हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में सरकार ने अपराध पर लगाम लगाने और प्रवासन कम करने का वादा किया था।
हालांकि, इस कानून की विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने तीखी आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि कानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कौन-सा व्यवहार अस्वीकार्य माना जाएगा, जिससे मनमाने फैसलों की आशंका बढ़ जाती है।
स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह कानून लोगों को अनिश्चितता में डाल देता है कि उनके किन कार्यों या अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल उनके खिलाफ किया जा सकता है। संगठन का दावा है कि इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जा सकता है।
वहीं, सरकार का तर्क है कि जो लोग समाज के नियमों का पालन नहीं करते या अपराध में शामिल होते हैं, उन्हें स्वीडन में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
स्वीडन के आव्रजन मंत्री जोहान फोर्सेल ने मार्च में विधेयक पेश करते हुए कहा था, “जो लोग सही काम करने का प्रयास नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वे देश में बने रह सकेंगे।”
नए कानून के तहत निवास परमिट की समीक्षा का दायित्व स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी को सौंपा गया है। एजेंसी के फैसलों के खिलाफ प्रवासी माइग्रेशन कोर्ट में अपील भी कर सकेंगे।