दैनिक खबरनामा| चंडीगढ़, 16 जून 2026. पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान ने अब एक नई पहचान हासिल कर ली है। नशे के खिलाफ कार्रवाई और तस्करों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ यह अभियान अब उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है, जिन्होंने नशे की लत को छोड़कर रोजगार और सम्मानजनक जीवन की राह चुनी है।

राज्य भर के नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार पूरा करने वाले अनेक युवा आज होटल, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल, डिलीवरी सेवाओं और निजी प्रतिष्ठानों में रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। कई लोग स्वयं का रोजगार शुरू कर समाज में नई पहचान बना रहे हैं।

ऐसे ही एक युवा, जिनका नाम गोपनीय रखा गया है, ने बताया कि नौकरी मिलने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि अब हर सुबह एक नई उम्मीद के साथ दिन की शुरुआत होती है और जीवन पहले से कहीं अधिक बेहतर महसूस होता है।

एक अन्य लाभार्थी, जो वर्तमान में एक त्वरित डिलीवरी सेवा से जुड़े हुए हैं, ने कहा कि नशा मुक्ति उपचार ने उन्हें जीवन दिया, लेकिन रोजगार ने उन्हें फिर से जीने का उद्देश्य दिया। नियमित आय और जिम्मेदारियों ने उन्हें नशे से पूरी तरह दूर रहने की प्रेरणा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्ति के बाद रोजगार से जुड़ना पुनर्वास की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है। अमृतसर स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र की काउंसलर भावना शर्मा के अनुसार, नशा छोड़ना केवल पहला कदम है। असली सफलता तब मिलती है जब व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य तय करता है और भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करता है। रोजगार उसे आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान करता है।

जालंधर नशा मुक्ति केंद्र के नोडल मनोचिकित्सक डॉ. अभय राज सिंह ने कहा कि उपचार, पुनर्वास और रोजगार को एक साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति नशे से बाहर निकलकर रोजगार प्राप्त करता है तो यह केवल उसकी व्यक्तिगत जीत नहीं होती, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज के लिए सकारात्मक बदलाव का संकेत होता है।

राज्य सरकार के अनुसार, मार्च 2025 में शुरू हुए ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान का प्रभाव अब केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की जिंदगी में नई उम्मीद, सम्मान और आत्मनिर्भरता का संदेश भी पहुंचा रहा है।

रोजगार और पुनर्वास की इन प्रेरणादायक कहानियों ने साबित कर दिया है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर नशे की गिरफ्त में फंसे लोग भी समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सफल और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। यही ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की सबसे बड़ी सफलता बनकर उभर रहा है।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

इशिता बतिश का डबल गोल्डन कमाल, एम.टेक अर्बन प्लानिंग में फिर बनीं यूनिवर्सिटी टॉपर

दैनिक खबरनामा/ब्यूरो/मोहाली/ 06 जून 2026: गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू), अमृतसर की…
Share to :

अभिभावकों को बड़ी राहत: पंजाब में निजी स्कूल अब सालाना 5% से अधिक नहीं बढ़ा सकेंगे फीस

दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 3 जून 2026: पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा…
Share to :

कांग्रेस पूरी तरह एकजुट, 2027 में करेगी सत्ता में वापसी: वड़िंग

पीएयू में चन्नी का स्वागत, विश्वविद्यालय के लिए 1000 करोड़ रुपये की…
Share to :

फर्जी वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान का बड़ा बयान, बोले— मेरी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है

दैनिक खबरनामा| चंडीगढ़, 16 जून 2026. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान…
Share to :