दैनिक खबरनामा । शिमला, 29 जून : हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बीच संचार सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए दूरसंचार विभाग ने व्यापक रणनीति तैयार की है। विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भूस्खलन, बादल फटने या फ्लैश फ्लड जैसी परिस्थितियों में भी आम लोगों, प्रशासन और राहत एजेंसियों के बीच संपर्क व्यवस्था प्रभावित न हो।
दूरसंचार विभाग के हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र के अपर महानिदेशक दूरसंचार विरेन्द्र कुमार ने बताया कि राज्य की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों तथा पिछले वर्षों में आई आपदाओं के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। तैयारियों की लगातार समीक्षा के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ नियमित समन्वय किया जा रहा है।
इस बार विभाग ने इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। इस प्रणाली के तहत यदि किसी क्षेत्र में एक टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क बाधित हो जाता है तो उपभोक्ता दूसरी कंपनी के उपलब्ध नेटवर्क के जरिए कॉल और आवश्यक संचार सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष मंडी के थुनाग, चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में आई आपदाओं के दौरान आईसीआर व्यवस्था ने संचार सेवाओं को चालू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस वर्ष यह सुविधा राज्य में आने वाले पर्यटकों और रोमिंग पर मौजूद उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
दूरसंचार विभाग ने सभी सेवा प्रदाताओं को क्षतिग्रस्त ऑप्टिकल फाइबर केबलों और पोलों की समय पर मरम्मत एवं प्रतिस्थापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वैकल्पिक फाइबर मार्ग विकसित करने, पर्याप्त बिजली बैकअप बनाए रखने, पोर्टेबल बेस ट्रांसीवर स्टेशन (बीटीएस), ओएफसी बहाली किट और अन्य आपातकालीन संसाधन तैयार रखने को भी कहा गया है।
इसके अतिरिक्त, सड़कों की उपलब्धता, डीजल जनरेटर के लिए ईंधन और लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है। विभाग का उद्देश्य मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक संचार नेटवर्क को बिना रुकावट संचालित रखना है।