दैनिक खबरनामा । मंडी, 8 जुलाई: हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के इस्तेमाल का एक और मामला उजागर हुआ है। इस बार प्रारंभिक शिक्षा विभाग में टीजीटी मेडिकल पद पर भर्ती के दौरान गड़बड़ी पकड़ी गई है। शिकायत मिलने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार टीजीटी मेडिकल की बैचवाइज भर्तियां वर्ष 2024 में हुई थीं। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर मेरिट सूची में जगह बनाई और नौकरी हासिल कर ली।
चार लोगों पर विजिलेंस की नजर
विजिलेंस ने शुरुआती पड़ताल के बाद चार आरोपितों की पहचान की है। ब्यूरो ने इनसे जुड़े सभी दस्तावेज संबंधित पंचायतों और राजस्व विभाग से मंगवाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में बताए गए तथ्य सही पाए जाने पर धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी आ चुका है ऐसा मामला
प्रदेश में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के नाम पर नौकरी हथियाने का यह पहला प्रकरण नहीं है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में 14 आयुर्वेदिक चिकित्सकों पर इसी तरह फर्जी ईडब्ल्यूएस दस्तावेज के जरिए नियुक्ति लेने का आरोप लगा था।
उस मामले में विजिलेंस ने मंडी, धर्मशाला और बिलासपुर में एफआईआर दर्ज की थी। मामला सामने आने के बाद कुछ चिकित्सकों ने खुद पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस नए खुलासे के बाद विजिलेंस ने सतर्कता बढ़ा दी है। अब बीते कुछ महीनों में विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त हुए कर्मचारियों के ईडब्ल्यूएस और अन्य आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों की भी दोबारा जांच की जा रही है।