दैनिक खबरनामा। कुल्लू, 11 जुलाई: हिमाचल में मानसून की पहली दस्तक के साथ ही कुल्लू जिले की सैंज घाटी एक बार फिर दहशत में है। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के चलते शुक्रवार शाम जीवानाला क्षेत्र की पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। मलबा और पत्थर नदी में जमा होने से पानी का बहाव बाधित हो गया और वहां अस्थायी झील बनने लगी है।
यह वही इलाका है जहां पिछले साल बादल फटने के बाद हुए भारी भूस्खलन से हुरननाला में कृत्रिम झील बन गई थी। एक साल के अंतराल में दोबारा उसी जगह पर इस तरह की घटना से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।
पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा
स्थानीय निवासियों के मुताबिक शुक्रवार शाम अचानक पहाड़ दरकने से भारी मात्रा में मिट्टी और बोल्डर नदी में गिर गए। इससे धारा की गति धीमी पड़ गई है। हालांकि इस बार नदी पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन मलबे का ढेर बढ़ने के कारण पानी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है, ऐसे में स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले साल हुआ था बड़ा नुकसान
25 जून को पिछले वर्ष इसी क्षेत्र में बादल फटने से आई तबाही में तीन लोगों की मौत हो गई थी। उस समय छह मकान पानी में बह गए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हुई थी। उस हादसे के निशान अभी भी घाटी में देखे जा सकते हैं। पुरानी त्रासदी की यादें ताजा होने से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
कई गांवों पर मंडरा रहा खतरा
जीवानाला में बन रही झील के फैलाव से जीवा, शरण, बिहाली, सैंज बाजार, खराहल, बशाहल, देहुरी, सपंगनी, तलाड़ा समेत पार्वती नदी के किनारे बसे अनेक गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत निगरानी तेज करे और निचले इलाकों के लिए जरूरी इंतजाम पहले से करे।
प्रशासन अलर्ट मोड में
एसडीएम बंजार पंकज शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। एनएचपीसी और अन्य संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।