दैनिक खबरनामा। शिमला, 13 जुलाई: हिमाचल प्रदेश में लगभग 27 साल के अंतराल के बाद सरकारी लॉटरी को फिर से शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार और राज्यपाल दोनों ने इसके संचालन को मंजूरी दे दी है। साथ ही “हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम-2026” को भी अधिसूचित कर दिया गया है। अब सिर्फ टेंडर प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री के अनुमोदन का इंतजार है।
अधिकारियों के अनुसार, लॉटरी से राज्य को सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद थी। लेकिन वित्त वर्ष के चार महीने पहले ही बीत जाने के कारण पहले साल आय काफी कम रहने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार सरकार को सिर्फ 10 से 20 करोड़ रुपये ही मिल पाएंगे। नियमित रूप से शुरू होने के बाद भी हर साल लगभग 50 करोड़ रुपये तक का राजस्व जुटने की संभावना जताई गई है।
पंजाब मॉडल पर आधारित होगी व्यवस्था
1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज और खराब आर्थिक स्थिति के बीच गैर-कर आय बढ़ाने के लिए सरकार पंजाब, सिक्किम और केरल की तर्ज पर लॉटरी शुरू करने जा रही है।
टेंडर की फाइल अभी सीएम के पास लंबित है। मुख्यमंत्री से मंजूरी मिलते ही राज्य कोषागार एवं लॉटरी विभाग टेंडर जारी करेगा। इसमें देश की 3 से 4 बड़ी लॉटरी कंपनियों के हिस्सा लेने की संभावना है। चयनित कंपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से टिकट बेचेगी और ड्रा कराएगी।
10 से 500 रुपये तक मिलेंगे टिकट
नई व्यवस्था के तहत 10 रुपये, 100 रुपये और 500 रुपये मूल्य के टिकट बाजार में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 6 बंपर ड्रा भी आयोजित किए जा सकेंगे।
हिमाचल में 1999 के आसपास वित्तीय गड़बड़ियों, धोखाधड़ी और जुए को बढ़ावा मिलने के चलते सरकारी लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब सरकार का कहना है कि इस बार कड़े नियमों और सुरक्षा इंतजामों के साथ लॉटरी को फिर से शुरू किया जाएगा।