दैनिक खबरनामा
14 जुलाई नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और शेयर बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। वहीं एशियाई शेयर बाजारों में शुरुआती कमजोरी के बाद कई प्रमुख सूचकांक संभलते हुए बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
मंगलवार को वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.3 प्रतिशत बढ़कर 85.18 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। हाल के दिनों में इसमें लगभग 10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 2.5 प्रतिशत मजबूत होकर 80.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जुलाई डिलीवरी वाले कच्चे तेल का भाव 282 रुपये यानी 3.83 प्रतिशत बढ़कर 7,642 रुपये प्रति बैरल पहुंच गया, जिसमें 15,479 लॉट का कारोबार हुआ। अगस्त अनुबंध भी 240 रुपये या 3.25 प्रतिशत चढ़कर 7,634 रुपये प्रति बैरल पर पहुंचा, जबकि इसमें 7,739 लॉट का कारोबार दर्ज किया गया।
तनाव के चलते बढ़ी आपूर्ति की चिंता
हालांकि मौजूदा कीमतें पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान दर्ज 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से अभी नीचे हैं, लेकिन होर्मूज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मूज में नाकेबंदी दोबारा लागू करने का आरोप लगाया, जिसके बाद ईरान पर अमेरिकी हमले और तेज हो गए। इस भू-राजनीतिक स्थिति का असर अमेरिकी शेयर फ्यूचर्स पर भी देखने को मिला, जहां कारोबार मिश्रित रुख के साथ रहा।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण फारस की खाड़ी के रास्ते तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
एशियाई और अमेरिकी शेयर बाजारों की स्थिति
मंगलवार को एशियाई बाजारों में शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में अधिकांश प्रमुख सूचकांकों ने रिकवरी दर्ज की। जापान का निक्केय 225 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 67,743.50 पर पहुंच गया। सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयर 2.3 प्रतिशत चढ़े।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 0.7 प्रतिशत बढ़कर 6,856.83 पर पहुंचा। शंघाई कंपोजिट 1.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,958.54 पर बंद हुआ। जून में चीन का निर्यात 27 प्रतिशत बढ़ा, जिसकी प्रमुख वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कंप्यूटर चिप्स की मजबूत मांग रही।
हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.3 प्रतिशत बढ़कर 24,301.71 पर पहुंचा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.1 प्रतिशत से कम गिरावट के साथ 8,804.70 पर बंद हुआ।
वहीं सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार दबाव में रहे। एसएंडपी 500 0.8 प्रतिशत, डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.3 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट 1.6 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुए। चिप सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 4.4 प्रतिशत और एनवीडिया के शेयर 3.5 प्रतिशत टूटे, जिससे एसएंडपी 500 पर सबसे अधिक दबाव पड़ा।
आगे क्या रह सकते हैं संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व सहित अन्य केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या उनमें वृद्धि करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि ऊंची ब्याज दरें महंगाई पर अंकुश लगाने में मदद करती हैं, लेकिन इससे आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने और निवेश बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका भी रहती है।
इसी बीच मंगलवार को बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, जेपी मॉर्गन चेस, गोल्डमैन सैक्स और वेल्स फ़ार्गो अपने तिमाही नतीजे जारी करने वाले हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि एसएंडपी 500 में शामिल कंपनियों की कुल आय वृद्धि 23.6 प्रतिशत रह सकती है।