दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 23 जुलाई: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जीरकपुर-पंचकूला बाईपास परियोजना को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई को नए सिरे से काम करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि परियोजना का दोबारा सर्वेक्षण कराया जाए और निर्माण से पहले हर संभव वैकल्पिक रास्ते पर विचार किया जाए, ताकि हरियाली को कम से कम नुकसान पहुंचे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एनएचएआई के मौजूदा प्रस्ताव के तहत बाईपास बनने से 4,000 से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। उनका तर्क था कि मार्ग में थोड़ा बदलाव करने या दूसरा अलाइनमेंट अपनाने पर बड़ी संख्या में पेड़ बचाए जा सकते हैं और साथ ही परियोजना की लागत भी घट सकती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दो विकल्प सुझाए। पहला, नदी किनारे की तरफ लाइन को थोड़ा शिफ्ट किया जाए। दूसरा, बाईपास को पंचकूला के सेक्टरों को अलग करने वाली सड़क से निकाला जाए। उनका दावा है कि इनमें से कोई भी विकल्प अपनाने पर पीरमुछल्ला इलाके की पूरी वन पट्टी को बचाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान प्रस्ताव किसी निजी एजेंसी द्वारा तैयार किया गया है, इसलिए तकनीकी जांच आईआईटी रुड़की जैसी प्रतिष्ठित संस्था से कराई जानी चाहिए। एनएचएआई ने इन सुझावों में तकनीकी अड़चनें बताईं। इस पर बेंच ने टिप्पणी की कि प्राधिकरण को आगे बढ़ने से पहले सभी विकल्पों की ईमानदारी से और गहराई से पड़ताल करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि काम शुरू करने से पहले नए सिरे से सर्वे हो और जरूरत पड़े तो इसके लिए किसी प्रतिष्ठित तकनीकी विशेषज्ञ संस्थान की मदद ली जाए। खंडपीठ ने एनएचएआई को 10 दिन के भीतर नया सर्वे पूरा कर ताजा रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है।
इस मामले में पर्यावरण को लेकर अदालत पहले भी सख्त रुख अपना चुकी है। 1 अप्रैल को हाईकोर्ट ने हरियाणा में बिना अनुमति किसी भी उम्र या प्रजाति के पेड़ काटने पर रोक लगा दी थी। इसमें जीरकपुर-पंचकूला बाईपास के लिए चिन्हित करीब 5,000 पेड़ भी शामिल थे। उस समय अदालत ने कहा था कि ऐसा लगता है कि हरियाणा सरकार के अधिकारी पर्यावरणीय संकट को लेकर गंभीर नहीं हैं। परियोजना को लेकर एक और अहम घटनाक्रम हाल ही में सामने आया। 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस 1,878 करोड़ रुपये की बाईपास परियोजना का शिलान्यास करना था, लेकिन आखिरी समय पर इसे शिलान्यास की सूची से हटा दिया गया।