सऊदी अरब ने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले ड्रोन मार गिराने का दावा किया, ट्रंप ने कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी
दैनिक खबरनामा ब्यूरो। दुबई, 27 जुलाई : अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार दो सप्ताह तक चले हवाई हमलों के अभियान को अचानक रोकने के महज दो दिन बाद सोमवार को पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की जानकारी दी। इन घटनाओं को ऐसे समय में देखा जा रहा है, जब माना जा रहा है कि तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया रणनीतिक फैसले की परीक्षा ले रहा है।
सऊदी अरब ने बताया कि राजधानी रियाद सहित पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन उसके वायु रक्षा तंत्र ने मार गिराए। रियाद का आरोप है कि ये ड्रोन इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों की ओर से दागे गए थे। सऊदी सरकार ने कहा कि वह इस हमले का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखती है।
उधर, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के प्रमुख लाल सागर बंदरगाह यनबू की ओर तेल ले जाने वाले ट्रांजिट स्थलों को निशाना बनाया। हूतियों के अनुसार, यह कार्रवाई यमन के हवाई क्षेत्र में सऊदी ड्रोन की कथित घुसपैठ के जवाब में की गई।
इससे पहले जॉर्डन ने दो ड्रोन मार गिराने की पुष्टि की, जबकि इराकी सुरक्षा सूत्रों ने उत्तरी इराक में कई ड्रोन हमलों की सूचना दी। हालांकि, इन ड्रोन के स्रोत की आधिकारिक तौर पर पहचान नहीं की गई है।
गौरतलब है कि जॉर्डन और उत्तरी इराक वही क्षेत्र हैं, जहां अमेरिका के दो सप्ताह लंबे हवाई अभियान के दौरान चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी। सप्ताहांत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों की सलाह पर इस अभियान को अचानक रोक दिया था। अधिकारियों का मानना था कि सैन्य अभियान अपनी प्रभावशीलता की सीमा तक पहुंच चुका है।
सोमवार को ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच “बहुत गहन बातचीत” चल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका “कड़ी सैन्य कार्रवाई” करने के लिए तैयार है। समाचार वेबसाइट एक्सियोस से बातचीत में उन्होंने कहा, “ज्यादा समय नहीं है। या तो बातचीत तेजी से आगे बढ़ेगी या फिर बिल्कुल नहीं।”
हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरू करने का इच्छुक नहीं है। साथ ही उसने कहा कि जब तक ट्रंप द्वारा घोषित युद्धविराम प्रभावी रहेगा, तब तक वह भी अपने हमलों को रोककर रखेगा।
ईरान ने यह भी दोहराया कि विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण कायम है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से जहाजों के निर्बाध आवागमन की मांग अमेरिका लगातार करता रहा है।
हवाई अभियान रुकने के बाद तेल कीमतों में गिरावट
सप्ताहांत में बिना किसी पूर्व घोषणा के ट्रंप ने लगातार 13 रातों तक चले अमेरिकी बमबारी अभियान को रोक दिया था। इस अभियान के दौरान ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।
अमेरिकी अभियान रुकने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने वाला ब्रेंट क्रूड सोमवार को करीब छह प्रतिशत टूटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 87.55 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंची।
अमेरिकी अधिकारियों और कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैन्य नेतृत्व ने ट्रंप को सलाह दी थी कि बमबारी अभियान अपनी अधिकतम रणनीतिक क्षमता तक पहुंच चुका है और इससे आगे अपेक्षित परिणाम मिलना कठिन होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फिर बढ़ा विवाद
ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने एक “जानकार सूत्र” के हवाले से दावा किया कि सोमवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना अनुमति गुजरने की कोशिश कर रहे छह “उल्लंघन करने वाले जहाजों” को वापस लौटा दिया गया। सूत्र के अनुसार, इनमें से एक जहाज दुर्घटनाग्रस्त भी हुआ।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नया बमबारी अभियान तब शुरू किया था, जब तेहरान ने उस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया था, जिसे अमेरिका ने बढ़ावा दिया है और जिसके तहत जहाजों को ओमान के तट के निकट से गुजरने की सलाह दी जाती है।
वहीं, ईरान का कहना है कि जहाजों को केवल उस समुद्री चैनल का उपयोग करना चाहिए जो उसके तट के अधिक निकट है और जिस पर उसका नियंत्रण है। तेहरान का यह भी कहना है कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से पारगमन शुल्क वसूलने का अधिकार रखता है।
दो सप्ताह तक चले अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और दक्षिणी क्षेत्रों में कई पुल, सुरंगें तथा सैन्य ठिकाने नष्ट हो गए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने पड़ोसी अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला किया, जिसमें चार अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसके अलावा ईरान ने खाड़ी देशों के नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया और इसे अमेरिकी हमलों में नागरिक ठिकानों पर हुई कार्रवाई का प्रतिशोध बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बमबारी अभियान रोकने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि वाशिंगटन के पास ऐसा कौन-सा प्रभावी दबाव शेष है, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ कमजोर करने के अपने उद्देश्य को हासिल कर सकें।
उल्लेखनीय है कि जून में वाशिंगटन और तेहरान के बीच अगस्त के अंत तक वार्ता के लिए एक रूपरेखा पर सहमति बनी थी। इन प्रस्तावित वार्ताओं का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत प्रमुख विवादित मुद्दों का समाधान तलाशना है। अमेरिका चाहता है कि समुद्री मार्ग से जहाजों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो, जबकि ईरान का कहना है कि उसे इस मार्ग पर निगरानी और नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है।