नाटो की तरह एक नया गठबंधन बनाने में जुटा पाकिस्तान।
दैनिक ख़बरनामा। न्यू दिल्ली, 27 जुलाई : खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। तीन वर्ष पहले दोनों देशों के बीच हुए व्यापक रक्षा सहयोग समझौते को अब कुवैत ने औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत सरकार ने डिक्री-लॉ नंबर 73, 2026 के माध्यम से इस समझौते का अनुमोदन किया, जिसे 26 जुलाई को सरकारी राजपत्र ‘कुवैत अल-यौम’ में प्रकाशित किया गया।
इस रक्षा समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य प्रशिक्षण, शिक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, रसद (लॉजिस्टिक्स), रक्षा प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान और विशेषज्ञता साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य पाकिस्तान और कुवैत की सशस्त्र सेनाओं के बीच संस्थागत स्तर पर दीर्घकालिक सैन्य संबंधों को मजबूत करना है।
समझौते में सैन्य उपकरणों के निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक संचार प्रणालियों, सैन्य अनुसंधान, सैन्य मीडिया तथा सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सहयोग का प्रावधान किया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक संयुक्त सैन्य समिति गठित की जाएगी, जो संयुक्त सैन्य अभ्यास, आधिकारिक यात्राओं और अन्य सहयोगी कार्यक्रमों का समन्वय करेगी।
समझौते में गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत दोनों देशों के बीच साझा किए गए गोपनीय दस्तावेजों या संवेदनशील सूचनाओं को बिना पूर्व लिखित अनुमति किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जा सकेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग डेढ़ वर्ष पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ भी एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उस समझौते में नाटो के अनुच्छेद-5 जैसी पारस्परिक सुरक्षा व्यवस्था शामिल बताई गई थी, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दूसरा देश सैन्य, आर्थिक, खुफिया तथा कूटनीतिक सहायता प्रदान करेगा।
इससे पहले पाकिस्तान ने यह भी संकेत दिया था कि तुर्की और कतर जैसे देश भी पाकिस्तान-सऊदी रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते (एसडीएमए) से जुड़ने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय रक्षा सहयोग का नया ढांचा उभर सकता है।