केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख ने जताया खेद, तकनीकी त्रुटि को बताया कारण
दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली 5 अगस्त : सोशल मीडिया कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स ने जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट पर कुछ समय के लिए रोक लगाए जाने की घटना पर भारत सरकार से क्षमा मांगी है। कंपनी के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कैपलन ने केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से मुलाकात के दौरान इस घटना पर खेद व्यक्त किया।
पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट को फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के अधिकारियों को तलब किया था। उस समय कंपनी ने स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई किसी नीति के तहत नहीं, बल्कि तकनीकी और परिचालन संबंधी त्रुटि के कारण अनजाने में हुई थी।
इसी बीच, हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। आरोप है कि फेसबुक पर ऐसे वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से अपमानजनक और अभद्र तरीके से दर्शाया गया था।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में देशभर में युवाओं का सबसे बड़ा आंदोलन देखने को मिला। इन प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हाल के सप्ताहों में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध आलोचनात्मक टिप्पणियां, व्यंग्य और उपहास से जुड़ी सामग्री भी बड़ी संख्या में साझा की गई, जिससे मेटा और भारत सरकार के बीच सामग्री के नियमन को लेकर तनाव बढ़ गया।
इस बीच, स्थानीय समाचार माध्यमों की रिपोर्टों के अनुसार मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने भी भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कंपनी के मंचों पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार भ्रामक वीडियो (डीपफेक) तथा अन्य परिचालन संबंधी कमियों को लेकर भारत सरकार से क्षमा मांगी।
रिपोर्टों के अनुसार, यह क्षमा याचना मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों और भारत सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के दौरान की गई। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
उल्लेखनीय है कि जुलाई में भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और उससे संबंधित विज्ञापनों को हटाने के निर्देश मेटा को दिए थे। उस समय कंपनी ने कहा था कि बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रति उसकी शून्य सहनशीलता की नीति है तथा ऐसे मामलों की पहचान और रोकथाम के लिए उसकी प्रणालियों को लगातार और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है।