दैनिक खबरनामा। शिमला, 6 अगस्त: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को लेकर भाजपा ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। शिमला में प्रेसवार्ता कर पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने सरकार पर कर्ज, झूठे वादों और संसाधनों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब सरकार नहीं बल्कि एक “सिंडिकेट” काम कर रहा है।
सीएम सुक्खू के नाम 5 उपाधियां
राजेंद्र राणा ने पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर व्यंग्य करते हुए कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में उनके नाम पांच नई उपाधियां जुड़ गई हैं।
राणा के अनुसार ये उपाधियां हैं: उत्तर भारत के सबसे धनी मुख्यमंत्री, अपने कार्यकाल में सबसे अधिक कर्ज लेने वाले सीएम, करीबी लोगों की सरकार चलाने वाले, सबसे ज्यादा झूठे चुनावी वादे करने वाले और राजनीतिक विरोधियों पर मुकदमे करवाने वाले।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सिंडिकेट सक्रिय है। इस सिंडिकेट का काम सरकारी संसाधनों को अपने लोगों के फायदे के लिए इस्तेमाल करना है।
उन्होंने बड़ी संख्या में ओएसडी, मीडिया सलाहकारों और समन्वयकों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। राणा ने कहा कि इन पदों से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ रहा है।
कर्ज के आंकड़े गिनाए
कर्ज को लेकर राणा ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 1971 से 2022 तक पिछली सभी सरकारों ने मिलकर करीब 68 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। वहीं मौजूदा सरकार ने सिर्फ चार साल में ही लगभग 44 हजार 600 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है। “सुक्खू सरकार हर साल औसतन 12 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है,” राणा ने दावा किया। साथ ही उन्होंने ओपीएस, महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह, एचआरटीसी और आपदा राहत के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
सरकारी संपत्तियां बेचने की तैयारी
राणा ने आरोप लगाया कि सरकार मुनाफा देने वाली सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की योजना बना रही है। उन्होंने हाल में संपन्न पंचायत चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि जनता ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आगे कहा, “आने वाले चुनावों में इसका असर और साफ दिखेगा। कांग्रेस को चार सीटें भी नसीब नहीं होंगी।”
भाजपा प्रवक्ता के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है।