दैनिक खबरनामा | 6 अगस्त 2026, नई दिल्ली: जोधपुर में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे आसाराम बापूको फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं मिली है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए दायर उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत ने तत्काल कोई राहत देने से इनकार करते हुए मामले को लंबित रखा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अंतरिम जमानत का आदेश पारित नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गंभीर होती है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिका रिकॉर्ड पर बनी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर इस पर आगे सुनवाई की जाएगी।
राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल भी मांगी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के दौरान इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल मिल चुकी है।
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर निर्णय लेने से पहले एम्स से विस्तृत चिकित्सीय रिपोर्ट तलब की थी। एम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनकी सेहत पर 24 घंटे निगरानी बनाए रखना जरूरी है।
21 जुलाई को हुई सुनवाई में अदालत ने राजस्थान सरकार को आसाराम की नवीनतम मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि यदि रिपोर्ट में स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत गंभीर पाई जाती है, तो केवल इलाज के उद्देश्य से सीमित अवधि की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है।
इससे पहले 17 जुलाई की सुनवाई में आसाराम की ओर से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि उनकी हालत वास्तव में कितनी गंभीर है।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी थी कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे, जहां उन्होंने पैदल चलकर दर्शन किए थे। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि संबंधित अधिकारियों से ताजा स्वास्थ्य रिपोर्ट प्राप्त कर निर्धारित समय के भीतर कोर्ट में पेश की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को 21 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।