दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 6 अगस्त: चंडीगढ़ में घर और जमीन से जुड़े जिन मुद्दों को लेकर हजारों परिवार सालों से आस लगाए बैठे थे, उन पर फिलहाल कोई ठोस राहत नहीं मिलेगी। लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार को जो जानकारी दी है, उसके बाद साफ हो गया है कि नगर निगम क्षेत्र के 22 गांवों में लाल डोरा सीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव अभी विचार के दायरे में नहीं है।
प्रशासन ने यह भी बताया कि पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने से संबंधित फाइल अभी गृह मंत्रालय में मंजूरी के लिए रुकी हुई है। इसी वजह से उन परिवारों को और इंतजार करना पड़ेगा जो लंबे समय से अपने मकानों को नियमित कराने और कानूनी अधिकार पाने की मांग कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है तो पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को अपनी संपत्ति पर पूर्ण कानूनी हक मिलने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर होना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश अब भी लागू
अपने जवाब में प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में शेयर के आधार पर प्रॉपर्टी बेचना, एक मकान को कई हिस्सों में बांटकर बेचना और फेज-1 के आवासीय इलाकों में फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर बढ़ाना जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी 2023 के आदेश ही मान्य रहेंगे।
इन्हीं आदेशों के कारण नियमों में किसी प्रकार की छूट देना संभव नहीं है। इसी वजह से आवासीय क्षेत्रों में री-डेंसिफिकेशन का प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ सका है।
सीएचबी निवासियों को थोड़ी राहत
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकान मालिकों के लिए एक अच्छी खबर जरूर है। प्रशासन के अनुसार नीड बेस्ड चेंज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। बोर्ड के तय दिशा-निर्देशों के अनुसार लोग अपने मकानों में जरूरत के हिसाब से निर्माण और बदलाव करवा सकते हैं। बढ़ते परिवार या अन्य आवश्यकताओं के चलते यह व्यवस्था कई परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी।
सहकारी समितियों पर यथास्थिति
सहकारी आवास समितियों की संपत्तियों के हस्तांतरण के मामले में भी प्रशासन ने स्थिति साफ की है। ऐसे मामलों में मौजूदा नियमों के तहत अनअर्न्ड इन्क्रीज की वसूली पहले की तरह होती रहेगी। इसमें अभी कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।
क्या अटका है
चंडीगढ़ में लाल डोरा का विस्तार, पुनर्वास कॉलोनियों को फ्रीहोल्ड करना और निर्माण से जुड़े नियम लंबे समय से बहस का विषय बने हुए हैं। प्रशासन के ताजा जवाब से यह संकेत मिलता है कि जब तक केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर नहीं लगाती, तब तक यथास्थिति बनी रहेगी।