दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 6 अगस्त: भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” का एलान करने वाली चंडीगढ़ पुलिस पर ही अब सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जब मामला विभाग के अंदर का हो तो कानून-कायदे ताक पर रख दिए जाते हैं। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी की सिफारिश के बाद भी मनीमाजरा थाना प्रभारी के खिलाफ कोई ठोस कदम न उठाए जाने से इस नीति की विश्वसनीयता पर उंगली उठ रही है।
जानकारी के मुताबिक करीब 15 दिन पहले सीबीआई के डीआईजी रैंक के अधिकारी ने चंडीगढ़ पुलिस के शीर्ष अफसरों को एक पत्र भेजा था। इसमें मनीमाजरा थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने की बात कही गई थी। सीबीआई ने यह पत्र एक शिकायत पर जांच के बाद भेजा था।
शिकायत में आरोप था कि थाना प्रभारी एक शराब कारोबारी से हर महीने 1 लाख रुपये नकद और 2 बोतल विदेशी शराब की मांग कर रहे हैं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि सीबीआई का आधिकारिक पत्र उन्हें मिल चुका है और उस पर मंथन जारी है। लेकिन पत्र आने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहा है कि पुलिस आखिर किस दबाव में चुप है।
पहले भी घिर चुके हैं थाना प्रभारी
यह पहली बार नहीं है जब मनीमाजरा थाना प्रभारी विवादों में आए हों। इससे पहले इलाके के लोगों ने प्रशासक को शिकायत भेजकर क्षेत्र में बढ़ते अपराध और पुलिस की ढीली कार्यशैली का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि अपराध बढ़ रहे हैं, पर पुलिस असरदार कार्रवाई नहीं कर पा रही। इसके बाद भी थाना प्रभारी को हटाया नहीं गया।
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक गुमनाम शिकायत भी वायरल हुई थी। बताया गया कि यह शिकायत मनीमाजरा थाने में तैनात एक कॉन्स्टेबल ने लिखी थी। उसमें गंभीर आरोप लगाए गए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार थाना प्रभारी शराब की दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों, सिगरेट बेचने वालों और स्थानीय दुकानदारों से अवैध उगाही के लिए दबाव बना रहे हैं। कॉन्स्टेबल को शराब ठेकों के बाहर तैनाती करने और ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक चालान काटने का आदेश दिया गया।
आरोप यह भी है कि किसी बीट पर स्थायी ड्यूटी दिलवाने के बदले 1 लाख रुपये महीना मांगे गए। शिकायत में कहा गया कि विरोध करने पर निलंबित करने और परेशान करने की धमकी भी दी गई।
इन तमाम आरोपों के बीच सीबीआई की सिफारिश पर कार्रवाई में देरी से “जीरो टॉलरेंस” की नीति सिर्फ कागजों तक सीमित दिख रही है।