दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 6 अगस्त 2026. पंजाब के विद्यालय शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दावा किया है कि पिछले चार वर्षों में राज्य की सरकारी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि कभी हजारों विद्यालयों में चारदीवारी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था तथा लाखों बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे, लेकिन आज पंजाब विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।
विधानसभा में शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में कार्यभार संभालने के समय प्रदेश के आठ हजार से अधिक विद्यालयों में चारदीवारी नहीं थी, तीन हजार दो सौ विद्यालयों में शौचालय उपयोग योग्य नहीं थे और लगभग चार लाख विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। इतना ही नहीं, पाठ्यपुस्तकें भी शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई महीने बाद विद्यालयों तक पहुंचती थीं।
उन्होंने बताया कि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। प्रत्येक वर्ष फरवरी के मध्य तक पाठ्यपुस्तकें जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और मार्च के अंत तक सभी विद्यार्थियों में उनका वितरण सुनिश्चित कर दिया जाता है।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि उन्होंने स्वयं राज्य के दो हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों का दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती क्षेत्रों, दूरदराज गांवों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे विद्यालय भी शामिल हैं। इन दौरों के आधार पर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ‘मिशन समर्थ’ पहल देश के सबसे बड़े आधारभूत शिक्षा अभियानों में शामिल हो चुकी है। इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के आधार पर समूहों में पढ़ाया जा रहा है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी समझ मजबूत कर सके। वर्तमान में इस अभियान से लगभग बारह लाख विद्यार्थी और सत्तर हजार से अधिक शिक्षक जुड़े हुए हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में जहां केवल अस्सी विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की थी, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर आठ सौ बयासी हो गई है। उन्होंने इसका श्रेय राज्य सरकार की विशेष शैक्षणिक मार्गदर्शन योजना को दिया।
उन्होंने एक छात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि साधारण परिवार से आने वाली हरनूरप्रीत कौर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेणी में तीन हजार एक सौ चालीसवीं रैंक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी किसी से कम नहीं हैं।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यदि आलोचना करनी है तो उनकी करें, लेकिन सरकारी विद्यालयों की छवि खराब न करें। उन्होंने कहा कि नकारात्मक प्रचार के कारण लोगों में सरकारी विद्यालयों को लेकर भ्रम फैलाया गया, जबकि आज यही विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का नया उदाहरण बन रहे हैं।
सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में कमी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब की नहीं बल्कि महामारी के बाद पूरे देश में देखने को मिली प्रवृत्ति है। इसके साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी को विशिष्ट पहचान संख्या दिए जाने के कारण वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं और फर्जी नामांकन समाप्त हुए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के उन्नीस हजार एक सौ पच्चीस सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर तीन हजार छह सौ अड़तीस करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त आगामी चरण में एक हजार करोड़ रुपये की राशि से विद्यालयों का और आधुनिकीकरण किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किए जा रहे हैं। लुधियाना स्थित शहीद सुखदेव थापर उत्कृष्ट विद्यालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कभी उपेक्षित रहे इस विद्यालय को अब विश्वस्तरीय बनाने के लिए अठारह करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसी विद्यालय के सत्रह विद्यार्थियों ने इस वर्ष राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी विद्यालयों को अंतिम विकल्प से निकालकर अभिभावकों की पहली पसंद बनाने का काम किया है। अब विद्यालयों को चलाने के लिए शिक्षकों को किसी से चंदा मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि सरकार ने आवश्यक संसाधनों और वित्तीय सहायता की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है।