दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 6 अगस्त 2026. पंजाब सरकार ने राज्य में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और किसानों तक पर्याप्त सिंचाई जल पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर नहरों और जलमार्गों के पुनर्जीवन का अभियान चलाया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू किए गए इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
प्रेस वार्ता और विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पिछली सरकारों के लंबे समय तक उपेक्षित रहने के कारण राज्य में भूजल स्तर लगातार नीचे चला गया था। इससे किसानों को अधिक गहरे बोर करवाने और अतिरिक्त बिजली का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने पूरे राज्य में 16 हजार किलोमीटर जलमार्गों (खालों) के निर्माण और पुनर्जीवन का व्यापक अभियान शुरू किया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसानों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए लगभग 39,049 क्यूसेक पानी नहरों में छोड़ा जा रहा है, जिससे अंतिम छोर तक स्थित खेतों को भी सिंचाई सुविधा मिल रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों के कारण राज्य के कई ब्लॉकों में भूजल स्तर 3 से 5 मीटर तक ऊपर आया है। इसके साथ ही भूजल के स्थान पर खनिजों से भरपूर नहरी पानी के उपयोग से गेहूं और धान की पैदावार में प्रति एकड़ एक से दो क्विंटल तक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे किसानों की आय बढ़ी है, बिजली की खपत घटी है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हुआ है।
जल संरक्षण को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने वर्षा जल संचयन पर भी विशेष जोर दिया है। हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि नगर परिषदों और नगर निगमों ने नए भवनों के नक्शे की स्वीकृति के लिए वर्षा जल रिचार्ज प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है, ताकि वर्षा का पानी सीधे भूजल भंडार में पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि राज्यभर में 510 भूजल रिचार्ज परियोजनाएं लागू की गई हैं। इनमें 192 तालाब आधारित और 246 नहर आधारित रिचार्ज योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कुओं और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से भी भूजल संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार जल संरक्षण को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता मानते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुरुओं की उस सोच को आगे बढ़ा रही है, जिसमें जल को केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और आने वाली पीढ़ियों के जीवन का आधार माना गया है।