दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 11 अगस्त 2026. पंजाब सरकार ने ब्यास और सतलुज दरियाओं के संवेदनशील हिस्सों में बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पंजाब विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित गांवों, कृषि भूमि और लोगों की जान-माल को सुरक्षित रखना है।
ब्यास नदी के अमृतसर रोड स्थित पुल से लेकर हरिके पत्तन तक संवेदनशील स्थानों की तकनीकी जांच कराकर जरूरी सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया गया है। इस अभियान के तहत राज्य सरकार के फंड से 32.09 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य पूरे किए जा चुके हैं। कुल 13 कार्यों में से 12 पूरे हो चुके हैं, जबकि एक कार्य अभी जारी है।
मंत्री ने बताया कि ब्यास नदी के किनारे अमृतपुर, भरोआणा, सरूपवाल, भागोबुड्ढा, आलूवाल, लोधीवाल, गिद्दड़पिंडी, बाऊपुर आइलैंड, आहली खुर्द, आहली कलां, चूहड़पुर, शेरपुर डोगरा, खिजरपुर, मंसूरवाल, गोइंदवाल, वैरोवाल, हंसावाला और घड़का सहित कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य किए गए हैं।
इन कार्यों में नदी के कटाव को रोकने के लिए स्टड, रिवेटमेंट और स्पर्स का निर्माण तथा मौजूदा बाढ़ सुरक्षा ढांचों को मजबूत करना शामिल है। कपूरथला और जालंधर जिलों में गिद्दड़पिंडी एक्सटेंशन रिवर एज क्षेत्र में सतलुज के साथ बाढ़ जोखिम कम करने के कार्य भी पूरे किए गए हैं। वर्ष 2025 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त एडवांस बांध नंबर-2 और सुज्जो कालिया एडवांस बांध की मरम्मत एवं मजबूती का काम भी पूरा हो चुका है।
बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि ढिल्लवां के ऊपरी हिस्से, गोइंदवाल बांध, वैरोवाल बांध और गाइड बांध को मजबूत एवं ऊंचा करने के साथ-साथ ब्यास नदी के दोनों किनारों पर घड़का में रिवेटमेंट के कार्य भी पूरे किए गए हैं। ब्यास नदी के दाएं किनारे गांव मरड़ में 360 फुट हिस्से की रिवेटमेंट का काम अभी प्रगति पर है।
उन्होंने बताया कि राज्य के फंड के अतिरिक्त मनरेगा के तहत 11.98 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा और नदी कटाव रोकने संबंधी कार्य भी आहली कलां, आहली खुर्द, सफदरपुर-खिजरपुर और घड़का के आसपास करवाए गए हैं। इन कार्यों का उद्देश्य गांवों और कृषि योग्य भूमि को बाढ़ तथा नदी की गाद से बचाना है। मंत्री ने बताया कि पिछले पांच बाढ़ मौसमों के दौरान ब्यास के इस हिस्से में किसी भी बाढ़ सुरक्षा बांध में दरार नहीं आई है।
सतलुज नदी के ममदोट क्षेत्र का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले बाढ़ मौसम में तेज बहाव और पानी के ऊंचे स्तर के कारण गांव दोना तेलू मल्ल के पास बाढ़ सुरक्षा ढांचे से जुड़े दो स्पर्स और आठ स्टड क्षतिग्रस्त हुए थे। हालांकि, मुख्य बाढ़ सुरक्षा बांध पूरी तरह सुरक्षित रहा और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त ढांचों का फील्ड निरीक्षण पूरा कर लिया गया है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर इनके पुनर्निर्माण और मरम्मत का प्रस्ताव बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दी गई है।
ममदोट क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 की बाढ़ तैयारी योजना के तहत संवेदनशील स्थानों की समीक्षा भी पूरी कर ली है। तकनीकी समितियों द्वारा निरीक्षण के बाद जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।
मंत्री ने बताया कि गांव गंधू किलचा हिठाड़ में आर.डी. 10,650 से आर.डी. 11,700 के बीच नया स्पर, 700 फुट जियो-बैग रिवेटमेंट और पांच स्टड बनाए गए हैं। इन कार्यों पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे सतलुज के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि की बाढ़ से सुरक्षा को और मजबूती मिली है।
बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक और तकनीकी रणनीति पर काम कर रही है। संवेदनशील स्थानों की पहचान, समय पर मरम्मत और नए सुरक्षा ढांचे तैयार करने से बाढ़ के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बाढ़ के समय राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पहले से ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है, ताकि पंजाब के लोगों की जान-माल, गांवों और किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि को बाढ़ और नदी के कटाव से सुरक्षित रखा जा सके।