दैनिक खबरनामा | 17 अगस्त | रांची: JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने छात्रों की मांगों पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय ने बताया कि अभ्यर्थियों के साथ हुई दो दौर की बातचीत के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनी है। इसी क्रम में 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने पर भी सरकार सहमत हो गई है।
मंत्री दीपिका पांडेय के मुताबिक, छात्रों के साथ चर्चा के बाद 14वीं JPSC परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं और JSSC-CGL मामले की जांच राज्य सरकार की जांच एजेंसी CID से कराने का फैसला किया गया है। यदि जांच के दौरान किसी मामले में केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता महसूस हुई, तो सरकार ED को भी पत्र लिखेगी।
JSSC-CGL परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर परीक्षा के परिणाम जारी किए गए थे और नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जा चुके हैं। कई अभ्यर्थी करीब एक वर्ष से नौकरी कर रहे हैं। चूंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में आगे की कार्रवाई को लेकर सरकार ने छात्रों के साथ विचार-विमर्श किया है।
सरकार ने CID जांच की निगरानी के लिए न्यायिक समिति गठित करने की बात कही है। सरकार का प्रयास है कि जांच 90 दिनों के भीतर पूरी कर मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष ले जाया जाए, जिससे अभ्यर्थियों को जल्द न्याय मिल सके।
दीपिका पांडेय ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और व्यवस्था में सुधार की जरूरत सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में है। उन्होंने कहा कि समय के साथ परीक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके।
मंत्री ने बताया कि झारखंड सरकार ने वर्ष 2023 में पेपर लीक के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला विधेयक विधानसभा से पारित किया था। उनका आरोप है कि उस समय बीजेपी ने इस विधेयक का विरोध किया था। हालांकि, बाद में छात्रों को संतुष्ट करने के लिए संसद में इसी तरह का कानून लाया गया।
सरकार की ओर से किए गए इन फैसलों के बाद JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन की आगे की दिशा पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।