दैनिक खबरनामा | 20 अगस्त | नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय बैंक की अनुमति के बाद LIC बैंक की कुल पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स में अधिकतम 9.99% तक हिस्सेदारी हासिल कर सकेगी। इससे LIC के लिए HDFC बैंक में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी को करीब 10% तक बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
HDFC बैंक ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि RBI ने 19 अगस्त को पत्र के माध्यम से LIC को यह अनुमति दी। बैंक के मुताबिक, LIC ने HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक के समक्ष आवेदन किया था।
14 अगस्त 2026 तक LIC के पास HDFC बैंक की 4.11% हिस्सेदारी मौजूद थी। नई मंजूरी के बाद बीमा कंपनी के पास बैंक के लगभग 5.88% अतिरिक्त शेयर खरीदने की संभावना है। हालांकि, हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रक्रिया RBI की ओर से निर्धारित शर्तों के मुताबिक ही पूरी करनी होगी।
हिस्सेदारी खरीदते समय LIC को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949, RBI के 2025 के शेयरहोल्डिंग नियमों, FEMA, SEBI के नियमों और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।
RBI की यह मंजूरी ऐसे समय मिली है, जब HDFC बैंक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर चुका है। अप्रैल से जून 2026 के बीच बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹19,059.72 करोड़ रहा। सालाना आधार पर इसमें करीब 4.98% की वृद्धि दर्ज की गई।
पहली तिमाही में बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 6.7% बढ़कर ₹33,535.95 करोड़ पहुंच गई। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार के ₹34,353 करोड़ के अनुमान से कम रहा। इसी अवधि में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट के आधार पर 3.26%, जबकि ब्याज अर्जित करने वाले एसेट के आधार पर 3.40% रहा।
बैंक के औसत डिपॉजिट में सालाना आधार पर 10.8% की बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह बढ़कर ₹30,386 अरब हो गया। दूसरी ओर, HDFC बैंक की कुल लोन बुक यानी एडवांस में 13.3% की वृद्धि हुई और यह ₹30,115 अरब पर पहुंच गई।
हालांकि, इस दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी में हल्की कमजोरी भी दिखाई दी। जून 2026 के अंत तक HDFC बैंक का ग्रॉस NPA बढ़कर 1.17% हो गया, जबकि मार्च 2026 में यह 1.15% था।
LIC की हिस्सेदारी बढ़ाने की RBI से मिली मंजूरी को HDFC बैंक में संस्थागत निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब LIC RBI की शर्तों और लागू नियमों के तहत बैंक में अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा स्तर से काफी ऊपर ले जा सकती है।