दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 26 सितंबर: भ्रष्टाचार के नौ साल पुराने मामले में घिरीं चंडीगढ़ की पूर्व एसडीएम शिल्पी पात्तर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई उनकी पुनर्विचार याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत में लंबित इस मामले का जल्द निपटारा करने के निर्देश भी दिए हैं। इस केस में शिल्पी पात्तर के अलावा उनके पति धीरज दत्त और बिचौलिया जीएस बराड़ भी आरोपी हैं।
बता दें कि 2017 में सीबीआई ने शिल्पी पात्तर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दी गई अभियोजन स्वीकृति को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह याचिका करीब नौ साल तक हाईकोर्ट में लंबित रही, जिसे इसी साल अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद सीबीआई कोर्ट में शिल्पी और अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल फिर से शुरू हो गया था।
घर पर छापे में मिले थे दो लाख रुपये
यह मामला अगस्त 2017 का है। उस समय एचसीएस अधिकारी शिल्पी पात्तर चंडीगढ़ में एसडीएम (ईस्ट) के पद पर तैनात थीं। सीबीआई ने 5 अगस्त 2017 की रात उनके आवास पर छापेमारी की थी।
सीबीआई को पंचकूला निवासी तरसेम कुमार ने शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि उनका अपने भाई संजय के साथ सेक्टर-26 की एक प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था। यह मामला तत्कालीन एसडीएम शिल्पी पात्तर की अदालत में था। आरोप है कि एसडीएम ने 3 अगस्त 2017 को बिना सुनवाई के उस संपत्ति को सील करने का आदेश दे दिया था।
पांच लाख की मांग, दो लाख में तय हुआ सौदा
सीलिंग की कार्रवाई के अगले दिन तरसेम की मुलाकात बिचौलिए जीएस बराड़ से हुई। बराड़ ने उसे शिल्पी पात्तर से मिलवाया और काम करवाने के एवज में पांच लाख रुपये की मांग की, जो बाद में दो लाख रुपये में तय हो गई। इसके बाद तरसेम ने सीबीआई से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाकर शिल्पी पात्तर, उनके पति और बिचौलिए जीएस बराड़ को गिरफ्तार कर लिया था।