दैनिक खबरनामा | 28 अक्टूबर | खार्तूम। सूडान में जारी गृह युद्ध के बीच हिंसा ने एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है। सोमवार शाम दक्षिण दारफुर प्रांत के न्याला शहर में एक व्यस्त बाजार पर ड्रोन से हमला किया गया। इस घटना में कम से कम 112 लोगों की मौत हो गई, जबकि 113 अन्य घायल बताए गए हैं। हमले के समय बाजार में बड़ी संख्या में आम नागरिक खरीदारी और नाश्ता करने के लिए मौजूद थे।
न्याला के तनकोंग बाजार को बनाया निशाना
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मानवाधिकार संगठन ‘इमरजेंसी लॉयर्स’ ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि हमला न्याला के डुमाया इलाके में स्थित ‘तनकोंग बाजार’ में हुआ। संगठन के मुताबिक, इस हमले में 100 से अधिक लोगों की जान गई और 113 लोग घायल हुए।
न्याला शहर पर अर्धसैनिक संगठन ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (आरएसएफ) का नियंत्रण है। आरएसएफ ने हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अस्पताल में पहुंचे 36 शव, 150 घायलों का इलाज
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (एमएसएफ) ने बताया कि न्याला स्थित उसके अस्पताल में हमले के बाद 36 शव लाए गए। इसके अलावा, आपातकालीन कक्ष में 150 घायल लोगों का उपचार किया गया। अलग-अलग संगठनों की ओर से जारी आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन सभी रिपोर्टें बड़े पैमाने पर जनहानि की पुष्टि करती हैं।
दारफुर विक्टिम्स ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी निदेशक एडम मूसा ओबामा के अनुसार, चश्मदीदों ने बताया कि सेना से जुड़े ड्रोन ने उस समय बाजार पर हमला किया, जब वहां आम लोग मौजूद थे। संगठन ने मृतकों की जानकारी जुटाकर उनकी मौतों का दस्तावेजीकरण भी किया है। हालांकि, महिलाओं और बच्चों की मौतों से संबंधित उनके बयान में आंकड़ों को लेकर विसंगति सामने आई है।
गृह युद्ध में ड्रोन हमले बने नागरिकों के लिए खतरा
सूडान में जारी संघर्ष के दौरान ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सूडानी सशस्त्र बल (एसएएफ) और आरएसएफ, दोनों ही विस्फोटकों से लैस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजारों और अन्य नागरिक ठिकानों पर ऐसे हमलों से आम लोगों की जान पर खतरा बढ़ गया है।
पिछले सप्ताह भी सूडानी सेना पर विवादित अब्येई क्षेत्र के एक बाजार पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगा था। उस घटना में 150 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर सामने आई थी। लगातार हो रहे हमलों ने सूडान में नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।