दैनिक खबरनामा। जम्मू, 01 नवंबर: लद्दाख की बंजर पड़ी जमीन पर कृषि की नई संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से शुरू की गई केसर की खेती का ट्रायल कामयाब रहा है। यहां महज 30 दिन के अंदर ही केसर के पौधों पर फूल आने लगे हैं, जबकि सामान्य तौर पर केसर की पहली फसल में फूल आने में लगभग दो महीने लग जाते हैं।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रविवार को केसर के इस खेत का दौरा कर पहली बार खिले फूलों का जायजा लिया। अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं, वहीं रविवार सुबह एक ही दिन में 72 फूल खिले। तेजी से फूल आने के कारण केवल चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर की पैदावार हो चुकी है। यह प्रयोग करीब 4000 वर्ग मीटर जमीन पर किया गया है।
इसके लिए एक अक्टूबर को लगभग 800 किलोग्राम यानी करीब 90 हजार उच्च गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के कंद लगाए गए थे। यह जमीन पहले पूरी तरह बंजर थी, जिसे प्रोजेक्ट हिम सरोवर के अंतर्गत उपजाऊ बनाकर पुनर्जीवित किया गया है।
युवाओं और किसानों को मिलेगा आर्थिक सहारा
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के तहत शुरू की गई है, जिसमें पारंपरिक खेती में विविधता लाकर किसानों और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इससे पहले भी लद्दाख प्रशासन अधिक कीमत वाली फूलों की खेती, खासकर लिलियम और ग्लेडियोलस के बड़े पैमाने पर उत्पादन में सफल प्रयोग कर चुका है।
इन प्रयासों से किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और कमाई के नए साधन बने हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि लद्दाख की जलवायु में कितनी क्षमता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती की कितनी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट की कामयाबी आने वाले समय में व्यावसायिक स्तर पर केसर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगी। इससे क्षेत्र में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की खेती और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
बाजार में केसर की ऊंची कीमत
उल्लेखनीय है कि केसर एक बहुमूल्य फसल है, जिसकी बाजार में हमेशा मांग रहती है और अच्छा दाम भी मिलता है। इससे किसानों को आय का एक नया और लाभदायक जरिया मिल सकता है।
भारत में जम्मू-कश्मीर केसर उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता है और देश के कुल केसर उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। ऐसे में लद्दाख में केसर की खेती को अभी प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया है, ताकि यहां के मौसम में इसकी अनुकूलता और आर्थिक लाभ का आकलन किया जा सके।
उपराज्यपाल ने इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले कृषि विभाग के अधिकारियों और खेत में काम करने वाले कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत, तकनीकी जानकारी और समर्पण के कारण ही इस पहल को शुरुआती सफलता मिल पाई है।