दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 01 नवंबर: शहरवासियों की लंबे समय से चली आ रही तीन बड़ी मांगों पर अब समाधान निकलने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। इनमें पुनर्वास कॉलोनियों के मकानों को मालिकाना हक देना, लीजहोल्ड कमर्शियल व औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करना और औद्योगिक क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाना शामिल है। इन फैसलों से हजारों परिवारों, व्यापारियों और उद्योगपतियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। ये मुद्दे लोकसभा में भी कई बार उठाए जा चुके हैं।
34,965 मकानों में मालिकाना हक, पहले चरण में 22 हजार को लाभ
पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना हक का मामला पिछले चार दशक से भी ज्यादा समय से अटका हुआ था। प्रशासन की योजना के तहत लगभग 34,965 मकानों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि, पहले चरण में इसका लाभ केवल करीब 22 हजार मूल आवंटियों को ही मिल पाएगा। उन्हें तय शुल्क जमा करवाने के बाद मालिकाना हक दिया जाएगा।
जिन लोगों ने मूल आवंटियों से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) या अन्य तरीकों से मकान लिए हैं, उन्हें अभी इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। यानी करीब 13 हजार मकानों के बाद के खरीदार फिलहाल इस लाभ से वंचित रहेंगे। इस संबंध में प्रशासन ने फरवरी 2026 में एक कमेटी बनाकर नियम तैयार किए थे।
लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड होंगी 8,600 प्रॉपर्टी
दूसरा बड़ा निर्णय शहर की व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने को लेकर है। चंडीगढ़ में कुल करीब 15,016 औद्योगिक और कमर्शियल प्रॉपर्टी हैं, जिनमें से लगभग 8,600 प्रॉपर्टी लीजहोल्ड पर हैं। फ्रीहोल्ड होने के बाद मालिकों के लिए संपत्ति की बिक्री, ट्रांसफर और बैंक लोन लेना आसान हो जाएगा। यह मांग भी पिछले दो दशक से अधिक समय से लंबित थी।
प्रशासन ने इस बारे में अप्रैल 2021 में गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक सहमति मांगी थी। इसके बाद अगस्त 2022 में मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी मांगी थी। जुलाई 2024 में प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। बाद में मई 2026 में प्रशासन ने नए सिरे से प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब गृह मंत्रालय ने मंजूर कर लिया है और अब औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
एफएआर बढ़ने से उद्योगों को विस्तार में मिलेगी मदद
तीसरा अहम फैसला औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने से जुड़ा है। मास्टर प्लान-2031 में बदलाव कर औद्योगिक इकाइयों को मौजूदा प्लॉट पर अधिक निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इससे उद्यमी अपनी ही जमीन पर अतिरिक्त फ्लोर और उत्पादन से जुड़ी सुविधाएं बना सकेंगे।
गोदाम, दफ्तर, कर्मचारियों के लिए जगह और अन्य व्यावसायिक जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त स्पेस मिल सकेगा। इसका सबसे ज्यादा लाभ इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के उन कारोबारियों को होगा, जिन्हें सीमित प्लॉट में बढ़ते कारोबार को संभालने में दिक्कत आ रही है।
एफएआर बढ़ने से नई जमीन खरीदने की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे निर्माण लागत और विस्तार खर्च पर भी नियंत्रण रहेगा। साथ ही औद्योगिक संपत्तियों की उपयोगिता और निवेश की संभावना भी बढ़ेगी। प्रशासन ने फेज-1 और 2 में एफएआर को 2.0 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके लागू होने पर उद्यमी दो हजार वर्ग तक का निर्माण कर सकेंगे।