चंडीगढ़ 7 जनवरी(जगदीश कुमार)हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बद्दी क्षेत्र में प्रस्तावित नए शहर ‘हिम चंडीगढ़’ के निर्माण से ट्राई-सिटी क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सीधा लाभ न केवल केंद्रीय शासित प्रदेश चंडीगढ़ को मिलेगा, बल्कि पंजाब सरकार द्वारा तेजी से विकसित किए जा रहे न्यू चंडीगढ़ को भी इसका बड़ा फायदा होगा।विशेषज्ञों के अनुसार हिम चंडीगढ़ के अस्तित्व में आने से पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में इजाफा होगा और रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी। वर्तमान में पंजाब सरकार न्यू चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित कर रही है, जहां आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हिम चंडीगढ़ की घोषणा के बाद न्यू चंडीगढ़ में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और जमीन के दामों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगा निवेशहिम चंडीगढ़ को चंडीगढ़-बद्दी मार्ग पर शीतलपुर क्षेत्र में बसाने की योजना है। यह नया शहर चंडीगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। इसे बद्दी-चंडीगढ़ रेल लाइन से जोड़ने का भी प्रस्ताव है, जिससे हिमाचल,चंडीगढ़ और पंजाब के बीच आवागमन और अधिक सुगम हो सकेगा।पीजीआई चंडीगढ़ की बद्दी और न्यू चंडीगढ़ से नजदीकी को देखते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि किसी भी परियोजना के साथ ‘चंडीगढ़’ नाम जुड़ने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, और हिम चंडीगढ़ की घोषणा मात्र से ही आसपास के क्षेत्रों में प्रॉपर्टी बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया है।कैबिनेट से मिली मंजूरी, विश्वस्तरीय टाउनशिप का लक्ष्य मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 30 दिसंबर 2025 को हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में हिम चंडीगढ़ परियोजना को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि शीतलपुर में विकसित होने वाला यह शहर एक विश्वस्तरीय टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य शहरी विकास के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।परियोजना के लिए लगभग 3,700 बीघा भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि 3,400 बीघा भूमि पहले से ही राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग के नाम दर्ज है। शहर की मास्टर प्लानिंग और डिजाइन के लिए शीघ्र ही कंसल्टेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।ग्रामीणों का विरोध भी आया सामनेदूसरी ओर बद्दी क्षेत्र की मलपुर और संडोली पंचायतों के ग्रामीणों ने प्रस्तावित टाउनशिप को लेकर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि चिन्हित भूमि में बड़ी मात्रा में कृषि और निजी जमीन शामिल है, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा और क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट समाप्त होने का खतरा है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगे।

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