दैनिक खबरनामा । अंबाला, 23 जून : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में अंबाला के एक युवक का नाम सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। उत्तराखंड पुलिस ने जांच के दौरान अंबाला शहर निवासी जसप्रीत सिंह को नामजद करते हुए उसकी तलाश तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मसूरी नगर पालिका, एसडीएम कार्यालय और हरिद्वार नगर निगम की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। इसके अलावा इंस्टाग्राम पर “jaspreet.devil” नामक अकाउंट से भी उत्तराखंड पुलिस को चुनौती देते हुए 25 जून 2026 को पुलिस थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई।
चारधाम और वीआईपी हस्तियों को बनाया निशाना
धमकी भरे संदेशों में केदारनाथ, बद्रीनाथ, ऋषिकेश और हरिद्वार सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बम विस्फोट करने का दावा किया गया। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी निशाना बनाने की बात कही गई।
ई-मेल में कथित तौर पर “खालिस्तान नेशनल आर्मी” का नाम इस्तेमाल करते हुए आईईडी और कार बम विस्फोट की धमकी दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है।
साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां जांच में जुटीं
देहरादून के एसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने बताया कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। साइबर सेल और अन्य खुफिया एजेंसियां ई-मेल, सोशल मीडिया पोस्ट, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज
सोशल मीडिया के माध्यम से धमकी देने के मामले में अंबाला निवासी जसप्रीत सिंह को नामजद किया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66-एफ के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वहीं, अंबाला के एसपी अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि फिलहाल उनके पास किसी सुरक्षा एजेंसी द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी या अंबाला में की गई किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं है। हालांकि मामले को लेकर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखा जा रहा है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आरोपी की तलाश में जुटी हैं और चारधाम यात्रा सहित संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।