दैनिक खबरनामा । नई दिल्ली, 23 जून : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षक बनाने के लिए एफसीएनआर (बी) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) जमा योजना से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को नई एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमा राशियों पर कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) तथा वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) की अनिवार्य शर्तों से छूट दी गई है। इससे बैंकों के लिए एनआरआई जमा जुटाना अधिक लाभदायक होगा और वे ग्राहकों को बेहतर ब्याज दरें देने में सक्षम होंगे।

आरबीआई ने हाल ही में घोषित विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा और एफसीएनआर (बी) जमा योजना से जुड़े कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, भारतीय बैंक एनआरआई ग्राहकों को उनकी एफसीएनआर (बी) जमा राशि के बदले ऋण प्रदान कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित जमा राशि पर लियन (Lien) लगाने की भी अनुमति दी गई है।

मूल राशि पर ही मिलेगा स्वैप सुविधा का लाभ

आरबीआई ने साफ किया है कि विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के तहत केवल एफसीएनआर (बी) जमा की मूल राशि (Principal Amount) पर ही हेजिंग लागत वहन की जाएगी। जमा पर मिलने वाले ब्याज को इस सुविधा में शामिल नहीं किया जाएगा। इससे बैंकों को इन जमाओं की वास्तविक लागत का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।

30 सितंबर तक नई जमा पर विशेष प्रोत्साहन

5 जून 2026 को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। इसके तहत 30 सितंबर 2026 तक बैंकों द्वारा जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई एफसीएनआर (बी) जमा पर हेजिंग की पूरी लागत आरबीआई वहन करेगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी एफसीएनआर (बी) जमा की मूल अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक रही है, लेकिन स्वैप सुविधा लेते समय उसकी शेष अवधि तीन वर्ष से कम बची हो, तब भी बैंक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

विदेश में भी दिया जा सकेगा ऋण

आरबीआई के अनुसार, बैंक एफसीएनआर (बी) खाताधारकों को विदेश में भी ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। ऐसे मामलों में बैंक संबंधित जमा राशि को सुरक्षा के रूप में रखते हुए उस पर लियन लगा सकेंगे।

जमा अवधि और राशि के आधार पर तय होंगी ब्याज दरें

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को एफसीएनआर (बी) जमा पर अलग-अलग ब्याज दरें तय करने की अनुमति दी है। हालांकि, ब्याज दरें केवल जमा की अवधि और राशि के आधार पर निर्धारित की जा सकेंगी तथा इसके लिए आरबीआई के जमा ब्याज दर संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।

सामान्य एफसीएनआर योजनाएं भी रहेंगी जारी

आरबीआई ने कहा है कि बैंक विशेष स्वैप सुविधा का उपयोग किए बिना भी सामान्य एफसीएनआर (बी) जमा योजनाएं जारी रख सकते हैं। हालांकि, ऐसी जमाओं का रिकॉर्ड अलग से रखना होगा।

इसके अलावा, बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से जुड़े नियमों को स्पष्ट करते हुए आरबीआई ने कहा कि स्वैप की अवधि ईसीबी की पुनर्भुगतान अवधि के अनुरूप होगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा पांच वर्ष तक ही रहेगी।

क्या होगा फायदा?

सीआरआर और एसएलआर से छूट मिलने के बाद बैंकों की लागत कम होगी, जिससे वे एनआरआई ग्राहकों को अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें दे सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा जमा में वृद्धि होगी, देश में डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा और भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।

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